पीरटांड़ में फिर खाट पर प्रसूता को 4 किमी पैदल ले जाने का मामला आय सामने, एक माह बाद फिर सामने आई बदहाल व्यवस्था की तस्वीर।
SHIKHAR DARPANSaturday, July 11, 2026
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गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।
पीरटांड़ प्रखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्र मधुबन पंचायत अंतर्गत उत्तरी पारसनाथ टोला के कुरुआटांड़ में एक बार फिर बुनियादी सुविधाओं के अभाव की दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। सड़क नहीं होने के कारण प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती महिला को ग्रामीणों ने खाट पर लादकर करीब चार किलोमीटर पैदल पिपराडीह मुख्य सड़क तक पहुंचाया, जिसके बाद उसे अस्पताल भेजा जा सका। जानकारी के अनुसार कुरुआटांड़ निवासी संतोष मुर्मू की पत्नी लोगो टुडू को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इसके बाद परिजनों ने तत्काल एंबुलेंस सेवा के लिए स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस पहुंचने में असमर्थ रही। मजबूरन ग्रामीणों और परिजनों ने महिला को खाट पर लिटाकर दुर्गम रास्तों से होते हुए पिपराडीह मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से निजी वाहन की व्यवस्था कर महिला को अस्पताल भेजा गया। गर्भवती महिला को परिजनों ने चिरकी बाजार स्थित आदित्य आर्यन सेवा सदन नामक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां महिला ने ऑपरेशन के माध्यम से एक बच्ची को जन्म दिया।
इधर ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। लगभग एक माह पूर्व भी गांव के बगल से इसी तरह की घटना सामने आई थी। उस समय मामला चर्चा में आया और प्रशासन ने संज्ञान भी लिया था, लेकिन गांव तक सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। नतीजतन एक बार फिर ग्रामीणों को ऐसी ही परेशानी का सामना करना पड़ा। परिजनों ने बताया कि सड़क के अभाव में मरीज की स्थिति और गंभीर हो गई। यदि गांव तक सड़क होती तो एंबुलेंस सीधे घर तक पहुंच सकती थी और समय पर इलाज मिल जाता। ग्रामीणों के अनुसार पिपराडीह तक सड़क बनी हुई है, लेकिन उसके आगे आज तक सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है। इसका खामियाजा कुरुआटांड़, दालुवाडीह, डाहिया, ईटाबेड़ा, गाड़ापरोम, सहेरबेड़ा, जिरबेड़ा, सतकटिया और बोरवाबेड़ा सहित कई गांवों के लोगों को रोज भुगतना पड़ता है। बारिश के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं।
बीमार, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रहता। घटना के बाद ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी गई। ग्रामीण बुधन सोरेन, सुशील मुर्मू, सानो मरांडी, गोपाल मुर्मू सहित अन्य लोगों ने कहा कि बार-बार ऐसी घटनाएं होने के बावजूद प्रशासन की नींद नहीं खुल रही है। ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव के समय नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव के बाद कोई पूछने तक नहीं आता। लोगों ने कहा कि वे 100 साल से इस स्थान पर रह रहे हैं, लेकिन अब तक स्थिति में कोई बदलाव नहीं हो पाया है। उन्होंने गांव तक शीघ्र सड़क निर्माण कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं की गई तो ग्रामीण आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इस घटना ने एक बार फिर क्षेत्र में विकास योजनाओं और स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। यहाँ यह बताते चले कि कल की 10जुलाई को पीड़ित गांव के ग्रामीणों ने उपायुक्त से मिल सड़क निर्माण के लिए ज्ञापन सौंपा था।