Type Here to Get Search Results !

25 लाख के इनामी टॉप माओवादी कमांडर अजय महतो उर्फ टाइगर गिरफ्तार, 240 से अधिक नक्सली मामलों में था वांछित,गिरिडीह एसपी ने प्रेस वार्ता का दी जानकारी।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।

झारखंड में नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत गिरिडीह पुलिस और सीआरपीएफ की कोबरा-209 बटालियन को बड़ी सफलता मिली है। पारसनाथ जोन में चलाए गए संयुक्त नक्सल विरोधी अभियान के दौरान प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन के 25 लाख रुपये के इनामी स्पेशल एरिया कमेटी (SAC) के शीर्ष कमांडर अजय महतो उर्फ मोछु उर्फ टाइगर को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार नक्सली के खिलाफ झारखंड के विभिन्न जिलों में हत्या, आईईडी विस्फोट, सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमला, पुलिस मुठभेड़, सरकारी संपत्तियों को उड़ाने और सड़क निर्माण में लगे वाहनों को जलाने समेत 240 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। गिरफ्तारी की जानकारी गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. विमल कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस कर दी। एसपी ने पूरे ऑपरेशन और गिरफ्तार नक्सली के आपराधिक इतिहास की विस्तार से जानकारी दी।

*गुप्त सूचना पर चलाया गया विशेष अभियान*
एसपी डॉ. विमल कुमार ने बताया कि 17 जुलाई 2026 को गिरिडीह पुलिस को खुखरा थाना क्षेत्र के हरलाडीह ओपी अंतर्गत जंगली इलाकों में नक्सलियों की संदिग्ध गतिविधि की सटीक गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के बाद पुलिस महानिरीक्षक (अभियान), झारखंड रांची एवं पुलिस महानिरीक्षक, सीआरपीएफ झारखंड सेक्टर के मार्गदर्शन में गिरिडीह पुलिस और कोबरा-209 बटालियन ने संयुक्त रूप से विशेष नक्सल विरोधी ऑपरेशन की योजना तैयार की। ऑपरेशन का फील्ड नेतृत्व गिरिडीह पुलिस के अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) सुरजीत कुमार और कोबरा-209 बटालियन के कंपनी कमांडर आकिफ अहमद बानी ने किया। तकनीकी और मानवीय इनपुट के आधार पर संयुक्त सुरक्षा बलों ने पिपराडीह गांव के खवासटांड़ टोला स्थित घने जंगल को चारों ओर से घेर लिया। सुरक्षा बलों की घेराबंदी देखकर अजय महतो ने भागने का प्रयास किया, लेकिन संयुक्त टीम ने सूझबूझ और रणनीति के साथ उसे दबोच लिया। गिरफ्तार अजय महतो पीरटांड़ थाना क्षेत्र के नावाडीह गांव का रहने वाला है।

*दो दशक से नक्सली संगठन में सक्रिय*
पुलिस के अनुसार अजय महतो वर्ष 2005 के आसपास नक्सली संगठन से जुड़ा था। शुरुआत में वह दस्ता सदस्य के रूप में सक्रिय रहा। बाद में संगठन में उसका प्रभाव बढ़ता गया और उसे लेवी वसूली, पुलिस के साथ मुठभेड़ कर हथियार और गोला-बारूद जुटाने तथा संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई। अजय महतो ने झुमड़ा पहाड़, लुगु पहाड़ और सारंडा जोन के घने जंगलों एवं पहाड़ी क्षेत्रों में नक्सलियों के ठिकाने तैयार करने और कई बड़ी नक्सली घटनाओं को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह पारसनाथ क्षेत्र में एरिया कमांडर के रूप में भी सक्रिय रहा था। बाद में संगठन में उसका कद बढ़ते हुए वह स्पेशल एरिया कमेटी (SAC) का सदस्य और शीर्ष कमांडर बन गया।
*240 से अधिक मामलों में था आरोपी*
गिरिडीह एसपी के अनुसार अजय महतो के खिलाफ झारखंड के विभिन्न जिलों में कुल 240 से अधिक मामले दर्ज हैं। इनमें गिरिडीह में 68, चतरा में 2, धनबाद में 15, पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) में 107, बोकारो में 37, रामगढ़ में 7, सरायकेला में 2 और हजारीबाग में 7 मामले शामिल हैं। इन मामलों में हत्या, पुलिस और सुरक्षाबलों पर हमला, आईईडी विस्फोट, सरकारी भवनों को उड़ाना, रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाना, सड़क निर्माण में लगे वाहनों को जलाना और लेवी नहीं देने पर ग्रामीणों की हत्या जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।

*सुरक्षाबलों पर हमले और कई जवानों की हत्या में रहा शामिल*
पुलिस के अनुसार अजय महतो के खिलाफ दर्ज मामलों में वर्ष 2008 में पीरटांड़ के दलवाडीह और बेदी क्षेत्र में हुए मुठभेड़ में सीआरपीएफ और जैप के जवानों की हत्या से जुड़े मामले शामिल हैं। वर्ष 2013 में सियरजोरी में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में पुलिस जवान अजित कुमार सिंह शहीद हुए थे। वर्ष 2014 में तुईयो गांव में पंचायत भवन को विस्फोट कर उड़ाने और धुलियामट्टी-धोलाई पहाड़ के समीप आईईडी विस्फोट में सीआरपीएफ जवान बादल राय की शहादत तथा 17 जवानों के घायल होने की घटना में भी उसकी संलिप्तता बताई गई है। वर्ष 2016 में खुखुरा थाना क्षेत्र के जीतपुर में पुलिस पार्टी को निशाना बनाकर किए गए बारूदी सुरंग विस्फोट में छह जवान घायल हुए थे। इसी वर्ष पीरटांड़ के जमुआ हेसलो में मुठभेड़ के दौरान सीआरपीएफ जवान बालेन हरिजन की हत्या की गई थी। इसके अलावा मुखबिरी के आरोप में ग्रामीणों की हत्या, लेवी नहीं देने पर हत्या, सरकारी भवनों को विस्फोट से उड़ाने और रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाने जैसी कई घटनाओं में भी अजय महतो के खिलाफ मामले दर्ज हैं।

*हत्या और आतंक का पर्याय बना हुआ था अजय महतो*
पुलिस के अनुसार अजय महतो पिछले करीब दो दशकों से झारखंड के कई जिलों में नक्सली गतिविधियों का प्रमुख चेहरा बना हुआ था। उस पर पुलिस मुखबिरी के शक में आम नागरिकों की हत्या, पति-पत्नी की गला रेतकर हत्या, लेवी नहीं देने पर ग्रामीणों को मौत के घाट उतारने और सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमला करने जैसे गंभीर आरोप हैं। वह नक्सली संगठन के लिए लेवी वसूली और क्षेत्र में संगठन का प्रभाव बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।
*गिरफ्तारी से नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका*
गिरिडीह एसपी डॉ. विमल कुमार ने कहा कि 25 लाख रुपये के इनामी SAC सदस्य अजय महतो की गिरफ्तारी गिरिडीह, पारसनाथ क्षेत्र और पूरे झारखंड में नक्सल उन्मूलन अभियान की दिशा में बड़ी सफलता है। उसकी गिरफ्तारी से भाकपा माओवादी के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। उन्होंने कहा कि गिरिडीह पुलिस लगातार नक्सली गतिविधियों पर निगरानी रख रही है और नियमित रूप से नक्सल विरोधी अभियान चलाए जा रहे हैं। पुलिस की लगातार कार्रवाई के परिणामस्वरूप गिरिडीह जिला नक्सल गतिविधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने वाले जिलों में शामिल है। एसपी ने बताया कि वर्ष 2024 में 10 लाख रुपये के इनामी नक्सली राम दयाल महतो ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद शिवलाल हेम्ब्रम और उनकी पत्नी सरिता हांसदा ने भी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की थी।

*नक्सलियों से आत्मसमर्पण की अपील*
गिरिडीह पुलिस ने नक्सली संगठनों से जुड़े सदस्यों से अपील की है कि वे नक्सली गतिविधियां छोड़कर प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण करें और राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति “नई दिशा-एक नई पहल” का लाभ उठाकर मुख्यधारा में लौटें।
*संयुक्त टीम ने की गिरफ्तारी*
इस विशेष अभियान में अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) सुरजीत कुमार, कोबरा-209 के असिस्टेंट कमांडेंट आकिफ अहमद बानी एवं शुभम फले, इंस्पेक्टर मेघराज राउत, सब इंस्पेक्टर अरुण शर्मा, पीरटांड़ थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार सिंह, मधुबन थाना प्रभारी दीपेश कुमार, खुखरा थाना प्रभारी रविंद्र कुमार, हरलाडीह ओपी प्रभारी नीरज कुमार, सब इंस्पेक्टर नरेंद्र कुमार यादव समेत कोबरा-209 के जवान और गिरिडीह जिला पुलिस बल के जवान शामिल थे।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.