"भगवान विमलनाथ के मोक्ष कल्याणक पर मुनि श्री संधान सागर महाराज की 21वीं बंदना, 4:30 घंटे में पूरी की 27 किमी की पदयात्रा"
SHIKHAR DARPANWednesday, July 08, 2026
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पीरटांड,शिखर दर्पण संवाददाता।
संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य एवं गुणायतन प्रणेता राष्ट्रसंत मुनि प्रमाण सागर जी महाराज के संघस्थ मुनि संधान सागर महाराज ने भगवान विमलनाथ के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर श्री सम्मेद शिखरजी स्थित भगवान विमलनाथ की सुवीर टोंक पर पहुँचकर श्रद्धापूर्वक चरण वंदना एवं बंदना की। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान के चरणों में श्रद्धाभाव से निर्वाण लाडू अर्पित किए। गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन 'विद्यावाणी' ने बताया कि यह मुनि श्री की 21वीं बंदना थी। चातुर्मास स्थापना से पूर्व उनका 27 बंदनाओं का संकल्प है। आगामी 29 जुलाई को चातुर्मास स्थापना प्रस्तावित है।मुनि श्री की तपश्चर्या और अनुशासन श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का विषय बना हुआ है।
वे लगभग 27 किलोमीटर की यह कठिन पर्वतीय बंदना मात्र साढ़े चार घंटे में पूर्ण कर लेते हैं। वह प्रातः 4:30 बजे पर्वतारोहण प्रारंभ कर सुबह 9 बजे तक वापस नीचे आ जाते हैं।उनकी यह चर्या देखकर श्रद्धालु आश्चर्यचकित रह जाते हैं। प्रवक्ता ने बताया कि इससे पूर्व मुनि श्री भगवान पार्श्वनाथ की पावन टोंक पर लगातार 36 घंटे तक एक ही आसन में ध्यान साधना कर चुके हैं। उनकी कठोर साधना का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि पर्वत पर वे आहार अथवा निहार नहीं करते। इतना ही नहीं, वे अपना कमंडलु भी नीचे ही छोड़कर जाते हैं, ताकि किसी प्रकार का विकल्प शेष न रहे और संपूर्ण साधना पूर्ण एकाग्रता एवं संयम के साथ संपन्न हो।मुनि संधान सागर महाराज की यह कठिन तपश्चर्या, तीर्थभक्ति और आत्मसंयम श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का अद्भुत उदाहरण बन रही है।