16 साल पुराने अफीम खेती मामले में 27 आरोपी बरी, विशेष न्यायालय ने सुनाया फैसला।
SHIKHAR DARPANFriday, July 10, 2026
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गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।
16 वर्ष पुराने चर्चित अफीम खेती मामले में गिरिडीह के विशेष न्यायाधीश प्रथम कंवलजीत चोपड़ा की अदालत ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए 27 अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। मामले की सुनवाई के दौरान एक अभियुक्त की मृत्यु हो चुकी थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता महीप मंयक ने फैसले को "न्याय की जीत" बताते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित करने में विफल रहा। उन्होंने बताया कि 14 फरवरी 2010 को लोकाय नयनपुर थाना में तत्कालीन अवर निरीक्षक आर.के. शाह के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में लुकाई नयनपुर गांव के 29 लोगों को आरोपी बनाया गया था। आरोप था कि सभी आरोपी अपनी जमीन पर अवैध रूप से अफीम की खेती कर उसका कारोबार करते थे। पुलिस ने मौके से 8 किलोग्राम अफीम जब्त करने का दावा किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष दलील दी कि पुलिस द्वारा जब्त किए गए मादक पदार्थों को विधिसम्मत और प्रमाणिक तरीके से साबित नहीं किया जा सका।
साथ ही जांच और साक्ष्यों में कई ऐसी कमियां रहीं, जिससे अभियोजन पक्ष के दावों पर गंभीर संदेह उत्पन्न हुआ।अधिवक्ता महीप मंयक ने अदालत से कहा कि ग्रामीण पिछले 16 वर्षों से न्यायालय की प्रक्रिया में शामिल होते रहे और अभियोजन पक्ष मामले को प्रभावी ढंग से सिद्ध नहीं कर सका। वहीं, अपर लोक अभियोजक अशोक दास ने अदालत में कहा कि मादक पदार्थों से जुड़े अपराध समाज के लिए गंभीर चुनौती हैं, इसलिए मामले को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं करते हैं। ऐसे में संदेह का लाभ अभियुक्तों को दिया जाना न्यायोचित है। इसी आधार पर सभी 27 अभियुक्तों को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया गया। बताया गया कि बरी हुए अभियुक्तों में कई की उम्र अब 80 वर्ष से अधिक हो चुकी है। फैसला सुनाए जाने के बाद सभी अभियुक्तों और उनके परिजनों में राहत और खुशी का माहौल देखा गया।