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भगवान ऋषभदेव का जन्म कल्याणक महोत्सव संपन्न, ऐरावत हाथी पर निकले प्रभु, सुमेरु पर्वत पर 108 कलशों से हुआ जन्माभिषेक।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।

श्रीजिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के तीसरे दिन प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का जन्म कल्याणक महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। संपूर्ण गुणायतन परिसर अयोध्या नगरी के स्वरूप में सुसज्जित रहा और "आदिनाथ भगवान की जय" के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने इस दिव्य आयोजन में भाग लिया। प्रातःकाल भगवान ऋषभदेव के जन्म प्रसंग का नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत किया गया। कथा के अनुसार तीर्थंकर बालक के जन्म लेते ही सौधर्म इंद्र का आसन कम्पायमान हुआ। अवधिज्ञान से जन्म का समाचार प्राप्त होने पर इंद्र की आज्ञा से धनपति कुबेर ने अयोध्या नगरी में रत्नों की वर्षा की, जिसका मनोहारी दृश्य श्रद्धालुओं को भावविभोर कर गया। इसके बाद माता मरूदेवी और राजा नाभिराय के महल से तीर्थंकर बालक को देवों एवं इंद्रों ने अपनी गोद में लेकर ऐरावत हाथी पर विराजमान किया।

भव्य शोभायात्रा में चंवर ढुरते देव, नृत्य करती इंद्र-इंद्राणियाँ तथा मंगल गीत गाती छप्पन कुमारियाँ आकर्षण का केंद्र रहीं। मुख्य पंडाल पहुंचने पर कृत्रिम सुमेरु पर्वत पर विराजमान भगवान ऋषभदेव का सौधर्म इंद्र एवं अन्य देवों द्वारा क्षीरसागर के पवित्र जल से भरे 108 मंगल कलशों से भव्य जन्माभिषेक (महामस्तकाभिषेक) किया गया। धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य मुनि प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि भगवान का जन्मोत्सव केवल एक ऐतिहासिक या धार्मिक घटना नहीं, बल्कि ज्ञान, धर्म और आत्मजागरण के प्रकाश का उत्सव है। उन्होंने कहा कि तीर्थंकर का जन्म चेतना, करुणा और लोककल्याण का प्राकट्य है। जन्मोत्सव तभी सार्थक होगा जब प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में संस्कार, संयम, समता और आत्मबोध का प्रकाश जागृत हो। मुनिश्री ने अपने प्रवचन में जन्म, जागरण, भक्ति और मुक्ति के चार सूत्रों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए आत्मचिंतन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को प्रतिदिन स्वयं से चार प्रश्न पूछने चाहिए—"मैं कौन हूँ?", "मेरा क्या है?", "मैं क्या कर रहा हूँ?" और "मुझे क्या करना चाहिए?"—इन्हीं प्रश्नों के उत्तर आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

धर्मसभा में मुनि संधान सागर, मुनि सार सागर, मुनि समादर सागर एवं मुनि रूप सागर महाराज भी उपस्थित रहे। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि पंचकल्याणक महामहोत्सव में देशभर से हजारों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। गुणायतन एवं श्री सेवायतन की ओर से सभी आगंतुकों के लिए आवास और शुद्ध भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है। प्रतिदिन सायं भगवान की भव्य आरती, पालना झुलाने की रस्म तथा तीर्थंकर बालक की विविध धार्मिक लीलाओं का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महामहोत्सव के चौथे दिन तप कल्याणक का आयोजन होगा। इस अवसर पर भगवान ऋषभदेव का राज्याभिषेक, स्वर्ग की अप्सरा नीलांजना का नृत्य तथा उसकी असामयिक मृत्यु के प्रसंग के माध्यम से भगवान के वैराग्य और जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करने की दिव्य झांकी प्रस्तुत की जाएगी।

संपूर्ण पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी अशोक भैया एवं बाल ब्रह्मचारी अभय भैया के निर्देशन में संपन्न हो रहा है।

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