पीरटांड में प्रशासन की लाख कोशिश के बाद भी बराकर नदी में अवैध बालू उत्खनन जारी, सैकड़ों ट्रैक्टरों से होती है ढुलाई।
SHIKHAR DARPANMonday, September 21, 2026
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गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।
*अनिलेश गौरव*
पीरटांड़ प्रखंड क्षेत्र में प्रशासन की सख्ती और अवैध खनन पर रोक के निर्देशों के बावजूद बालू के अवैध कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बराकर नदी के विभिन्न घाटों से बड़े पैमाने पर बालू का अवैध उत्खनन कर प्रतिदिन सैकड़ों ट्रैक्टरों के माध्यम से आसपास के क्षेत्रों और अन्य जिलों में भेजा जा रहा है। इस मामले को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जाता है कि एनजीटी के निर्देशों और जिला प्रशासन द्वारा अवैध बालू उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण पर रोक के निर्देशों के बावजूद बराकर नदी के घाटों पर बालू उठाव का सिलसिला जारी है। स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह से लेकर देर रात तक नदी घाटों से ट्रैक्टरों में बालू लोड कर उसकी ढुलाई की जाती है। कई स्थानों पर कथित रूप से ओवरलोड ट्रैक्टरों का परिचालन भी किया जाता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। जानकारी के अनुसार गिरिडीह जिला प्रशासन की ओर से प्रत्येक माह जिला टास्क फोर्स की बैठक आयोजित कर अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं। इसके बावजूद पीरटांड़, डुमरी और मुफस्सिल क्षेत्र के विभिन्न नदी घाटों में अवैध बालू कारोबार जारी रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे प्रशासन के निर्देशों के प्रभावी अनुपालन को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
*कई घाटों से बालू उठाव का आरोप* स्थानीय सूत्रों के अनुसार बराकर घाट, चंपानगर, बिशनपुर, जमुआ समेत कई घाटों से कथित रूप से बड़े पैमाने पर बालू का उठाव किया जा रहा है। आरोप है कि कई बार सरकारी कार्य के नाम पर बालू के उठाव और परिवहन का हवाला देकर इसकी आड़ में व्यावसायिक स्तर पर बालू की ढुलाई की जाती है। बताया जाता है कि बराकर नदी से निकाला गया बालू बराकर, करहवार, घोरचांची, घोरबाद, पालगंज, चिलगा, बिशनपुर, हरलाडीह, खुखरा और चिरकी होते हुए धनबाद जिले के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के अंधेरे और अहले सुबह बालू लदे वाहनों की आवाजाही अधिक देखी जाती है। *कई जगहों पर अवैध भंडारण की भी शिकायत* ग्रामीणों के अनुसार बोनासिंघ, पालगंज, बिशनपुरा, चिलगा, चिरकी और मधुबन सहित अन्य स्थानों पर बालू के अवैध भंडारण की भी शिकायतें हैं। बड़े पैमाने पर बालू के डंप किए जाने से सरकार को राजस्व की क्षति होने के साथ-साथ नदी और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बालू उठाव से नदी के प्राकृतिक स्वरूप में बदलाव आ रहा है। वहीं, भारी वाहनों के परिचालन से ग्रामीण सड़कों की स्थिति प्रभावित होने और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है।
*प्रशासन से कार्रवाई की मांग* ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खनन विभाग से मामले की गंभीरता से जांच कराने, नदी घाटों का निरीक्षण करने तथा अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, कुछ स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि अवैध बालू कारोबार को जारी रखने के लिए संबंधित स्तर पर कथित रूप से नियमित सुविधा शुल्क दिए जाने की चर्चा है। इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और खनन विभाग इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और बराकर नदी में कथित अवैध बालू उत्खनन एवं परिवहन पर रोक लगाने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।