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माथाडीह वार्ड नंबर 21 में प्रस्तावित 'वर्किंग वूमेन हॉस्टल' का स्थानीय दलित-आदिवासी रैयतों ने किया विरोध//डीसी को दिए गए आवेदन की उचित जांच और हॉस्टल निर्माण अन्यत्र करने की मांग।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।

गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 21 स्थित माथाडीह मौजा की कथित सीसीएल जमीन पर बसे पुराने दलित-आदिवासी रैयतों ने जमीन पर उनकी निर्भरता तथा मालिकाना हक का दावा करते हुए वहां प्रस्तावित 2.33 एकड़ जमीन पर 'वर्किंग वूमेन हॉस्टल' निर्माण का आज दूसरी बार शांतिपूर्ण विरोध करते हुए जिले के उपायुक्त को इस बाबत पूर्व में दिए गए जन आवेदन की उचित जांच और हॉस्टल निर्माण अन्यत्र कराने की मांग की है। माथाडीह वासियों द्वारा हॉस्टल निर्माण के शांतिपूर्ण विरोध का पूर्व जिप सदस्य एवं ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लाक के जिला संयोजक राजेश यादव ने भी समर्थन देते हुए उपायुक्त से स्थानीय रैयतों के आवेदन का उचित संज्ञान लेकर जांच तथा अन्यत्र कहीं खाली जमीन पर हॉस्टल निर्माण की मांग की है। आज इसे लेकर एक आपात बैठक निर्माण स्थल के समीप की गई।

जहां स्थानीय लोगों ने अपनी दयनीय स्थिति तथा परेशानियां को बयां करते हुए कहा कि, इतनी थोड़ी सी जमीन ही 30-40 घरों के लिए बची हुई है। इस पर वे लगातार निर्भर रहे हैं। अगर यह जमीन भी चली गई तो उनके पास कुछ भी नहीं बचेगा। उन्होंने कहा कि, उन्हें जमीन का कोई मुआवजा भी नहीं मिला है, न ही उनकी जमीन अधिग्रहित की गई है। कहा कि, अपनी जमीन बचाने के लिए वे लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से हर स्तर की लड़ाई लड़ेंगे। वहीं उनकी बातों को सुनने के उपरांत श्री यादव ने कहा कि, कथित विकास के नाम पर सरकार गरीबों को उजाड़ने की नीति बंद करे। गरीब जिस जमीन पर निर्भर हैं, उस जमीन को छोड़कर अन्यत्र हॉस्टल का निर्माण किया जाए। उन्होंने ग्रामीणों से इसके लिए एकजुट होकर शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक, संवैधानिक और न्यायिक लड़ाई लड़ने की अपील करते हुए इस संघर्ष में पूरा समर्थन देने का ऐलान किया। मीटिंग में मुख्य रूप से पार्टी नेता मनोज कुमार यादव एवं स्थानीय वार्ड पार्षद राजकुमार भुईंया सहित विजय कोल, सिन्टू कुमार दास, टीपू दास, जागो कोल सहित अन्य मौजूद थे।

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