क्रोध को पहचानो, उसकी हानि समझो, कारण खोजो और रोकने का अभ्यास करो : मुनि प्रमाण सागर।
SHIKHAR DARPANWednesday, September 16, 2026
0
पीरटांड,शिखर दर्पण संवाददाता।
दशलक्षण पर्व केवल पूजा, आराधना, व्रत और धार्मिक क्रियाओं का अवसर नहीं, बल्कि अपने भीतर झांककर यह देखने का समय है कि धर्म हमारे जीवन में कितना उतरा है। अब केवल धर्म करने का नहीं, बल्कि धर्ममय बनने का संकल्प लेना चाहिए। उक्त बातें राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म पर प्रवचन करते हुए कहीं। मुनि श्री ने कहा कि क्षमा हमारा स्वभाव है और क्रोध उस स्वभाव को विकृत करने वाली मनोवृत्ति है। क्रोध को समझने के लिए क्रोध, बोध, शोध और रोध का सूत्र अपनाएं। क्रोध को पहचानें, उसकी हानि का बोध करें, उसके कारण को खोजें और फिर उसे रोकने का अभ्यास करें। उन्होंने कहा कि हम अक्सर अपने क्रोध का कारण सामने वाले को मानते हैं, जबकि उसके पीछे हमारी अपेक्षा, आग्रह और अहंकार छिपा होता है। जितना बड़ा अहंकार, उतना तीव्र क्रोध। कई बार छोटी-सी बात वर्षों तक मन में बनी रहती है। इसलिए क्षमा का अर्थ केवल दूसरे को माफ करना नहीं, बल्कि व्यक्ति और घटना दोनों को अपने मन से मुक्त करना है।
मुनि श्री ने कहा कि किसी के कुछ कहने पर तुरंत जवाब देना रिएक्शन है, जबकि कुछ क्षण रुककर सोच-समझकर जवाब देना रिस्पॉन्स है। क्रोध के समय कुछ सेकंड का मौन भी विवाद को रोक सकता है। सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर भी क्रोध में तत्काल संदेश भेजने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्रोध की आग सबसे पहले उसी व्यक्ति को जलाती है, जिसके भीतर वह पैदा होता है। क्षमा करना किसी पर उपकार नहीं, बल्कि अपने मन का बोझ उतारना है।श्रद्धालुओं को उस व्यक्ति को स्मरण कर क्षमा भाव रखने का अभ्यास कराया, जिसके प्रति मन में कटुता हो। इस अवसर पर मुनि संधान सागर, मुनि सार सागर, मुनि समादर सागर एवं मुनि रूप सागर महाराज मंचासीन रहे। गुणायतन के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि दशलक्षण पर्व के प्रथम दिन ध्वजारोहण, कलश स्थापना एवं अखंड दीप स्थापना की गई। मुनि प्रमाण सागर महाराज की रचना ‘प्रमाण पूजांजलि’ पूजन पुस्तक का विमोचन भी हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 5:30 बजे भावनायोग से हुई। इसके बाद अभिषेक, शांतिधारा, प्रवचन एवं पर्व पूजन हुआ। दोपहर में कक्षा तथा शाम 6 बजे शंका समाधान कार्यक्रम आयोजित किया गया। नया गुणायतन परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा।