फल की चिंता छोड़ उत्साह से करें पुरुषार्थ, सम्मान को बनाएं विनम्रता का आधार : मुनिश्री प्रमाण सागर।
SHIKHAR DARPANFriday, September 04, 2026
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मधुवन,शिखर दर्पण संवाददाता।
गुणायतन में आयोजित शंका समाधान कार्यक्रम में मुनिश्री प्रमाण सागर महाराज ने श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए जीवन में पुरुषार्थ, धैर्य और विनम्रता का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि सफलता केवल भाग्य के भरोसे नहीं मिलती, बल्कि सही दिशा में किए गए पुरुषार्थ से प्राप्त होती है। व्यक्ति को पूरे उत्साह से कर्म करना चाहिए, लेकिन परिणाम को लेकर अत्यधिक उत्सुकता और अधीरता से बचना चाहिए। “उत्साह जगे, उत्सुकता मिटे तो अगाध धैर्य” का संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि उत्साह कर्म के लिए प्रेरित करता है, जबकि परिणाम की बेचैनी व्यक्ति को विचलित करती है।मुनिश्री ने कहा कि हमारे हाथ में कर्म है, उसका परिणाम नहीं। भाग्य अवसर प्रदान कर सकता है, लेकिन उस अवसर का लाभ उठाने के लिए पुरुषार्थ आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से कर्म सिद्धांत में विश्वास रखते हुए कर्मयोगी बनने का आह्वान किया। व्यापार और जीवन में सफलता के लिए वास्तविक परिस्थितियों को समझकर योजना और रणनीति के साथ कार्य करने की सलाह दी।
मान-सम्मान को लेकर उन्होंने कहा कि सम्मान अहंकार का विषय नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है। गुण और वैभव बढ़ने के साथ व्यक्ति में विनम्रता भी बढ़नी चाहिए। फलदार वृक्ष का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार फल आने पर वृक्ष की डालियां झुक जाती हैं, उसी प्रकार उपलब्धियां व्यक्ति को और अधिक सहज व विनम्र बनाएं।सकारात्मक बने रहने के लिए मुनिश्री ने शांत और सहज रहने, अच्छा साहित्य पढ़ने, सकारात्मक लोगों की संगति करने तथा नकारात्मकता फैलाने वालों से दूरी बनाए रखने के सूत्र बताए। उन्होंने व्रत और नियमों के पालन में भी मर्यादा, शुद्धता और दृढ़ता बनाए रखने की सीख दी। राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि गुणायतन में गुना से आए अजीत कुमार जैन के नेतृत्व में करीब 200 श्रद्धालुओं द्वारा सात दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है। विधान बाल ब्रह्मचारी अशोक भैया के निर्देशन में धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में चल रहा है।