धर्म, कर्तव्य और परिवार में संतुलन से बनेगा जीवन सार्थक : मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज।
SHIKHAR DARPANTuesday, August 25, 2026
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मधुबन,शिखर दर्पण संवाददाता।
राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि धर्म और व्यवहारिक जीवन में संतुलन के लिए विवेक, पुरुषार्थ और सही दृष्टिकोण जरूरी है। मधुबन में आयोजित दैनिक शंका समाधान कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने परिवार, धर्म, प्रशासनिक दायित्व और आत्मकल्याण से जुड़े सवाल पूछे। मुनि श्री ने कहा कि व्यक्ति को केवल भवितव्यता के भरोसे निष्क्रिय नहीं बैठना चाहिए, बल्कि उपलब्ध साधनों का सदुपयोग करते हुए निरंतर पुरुषार्थ करना चाहिए। धर्मश्रवण, तत्त्वचिंतन, जिनवाणी तथा देव-गुरु-धर्म का आश्रय आत्मकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण है। एक आईएएस अधिकारी के सवाल पर उन्होंने कहा कि कर्तव्य पालन भी व्यक्ति का धर्म है। प्रशासनिक अधिकारी को निष्पक्षता और विवेक के साथ जनता के व्यापक हित में कार्य करना चाहिए। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कठोरता कर्तव्य का हिस्सा हो सकती है, लेकिन व्यक्तिगत पूर्वाग्रह या दुर्भावना से किया गया व्यवहार उचित नहीं है।उन्होंने कहा, “समाज के लिए कानून है, कानून के लिए समाज नहीं है।”
उन्होंने कहा, “समाज के लिए कानून है, कानून के लिए समाज नहीं है।” संयुक्त परिवार में प्रेम और सद्भाव बनाए रखने के सवाल पर मुनि श्री ने कहा, “बड़े छोटों का ध्यान रखें और छोटे बड़ों का मान रखें।” उन्होंने कहा कि एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान, प्रेमपूर्ण व्यवहार और छोटी बातों को नजरअंदाज करने की क्षमता परिवार की एकता को मजबूत करती है। भावनायोग के अनुभव पर मुनि श्री ने मानसिक दृढ़ता और सकारात्मक भावनाओं के महत्व को बताया। वहीं, बालिकाओं में धार्मिक संस्कारों से जुड़े प्रश्न पर उन्होंने कहा कि विशेष पुण्य और संस्कारों के कारण जीवन में अनुकूल निमित्त प्राप्त हो सकते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से हर मांगलिक अवसर को पुण्य कार्यों से जोड़ने का आह्वान किया, ताकि नई पीढ़ी में अच्छे संस्कार विकसित हों। गुणायतन के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि मुनि श्री का शंका समाधान कार्यक्रम प्रतिदिन शाम छह बजे आयोजित हो रहा है, जिसमें श्रद्धालुओं को धर्म, परिवार, व्यवहार और आत्मकल्याण से जुड़े प्रश्नों का समाधान मिल रहा है।