अतिक्रमण की भेंट चढ़ रहा ऐतिहासिक कूष्माडीह मेला मैदान, ग्रामीणों ने प्रशाशन को सौंपा आवेदन।
SHIKHAR DARPANThursday, July 02, 2026
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सरिया,शिखर दर्पण संवाददाता।
बगोदर-सरिया और डुमरी प्रखंड के लोगों के लिए संगम स्थल के रूप में विख्यात कूष्माडीह सार्वजनिक मेला मैदान और चड्ढेवा बाज़ार क्षेत्र में बढ़ता अतिक्रमण और वन भूमि सीमा विवाद अब एक गंभीर समस्या बन चुका है। आपसी तालमेल की कमी का फायदा उठाकर कुछ लोगों द्वारा उक्त जमीन पर अवैध कब्जा किया जा रहा है, जिससे कुसमाडीह और बलियारी गांव के बीच मनमुटाव चरम पर पहुंच गया है और स्थिति तनावपूर्ण होती जा रही है। भविष्य में किसी भी बड़े टकराव को रोकने तथा सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने मुखिया पंकज महतो के नेतृत्व में एकजुट होकर प्रशासन से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। अतिक्रमण को हटाने और क्षेत्र में शांति व्यवस्था पुनर्स्थापित करने की मांग को लेकर स्थानीय नागरिकों ने नागरिक प्रशासन और रेंजर फॉरेस्ट ऑफिसर (RFO) सरिया को एक सामूहिक आवेदन सौंपा है। इस बाबत ग्रामीणों ने बताया कि इस मैदान में करीब 4 वर्ष पूर्व एक भव्य मंदिर की स्थापना की गई थी, जिसके बाद से यहाँ हर साल एक विशाल मेला लगता है। इस मेले में बगोदर, सरिया और डुमरी प्रखंड के लगभग 10 से 15 हजार श्रद्धालुओं और आम लोगों की भीड़ जुटती है।
मेले के अलावा यहाँ हर शुक्रवार और सोमवार को दो हाट बाजार भी लगते हैं, जिससे कई पंचायतों के लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। लेकिन अतिक्रमणकारियों द्वारा धीरे-धीरे जमीन घेरते हुए मुख्य रास्तों को ब्लॉक किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा और मेले का अस्तित्व भी खतरे में पड़ जाएगा। विवाद का मुख्य कारण कुसमाडीह और बलियारी ग्राम के मध्य स्थित इस बाज़ार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले फॉरेस्ट जमीन खाता संख्या-91 और प्लॉट संख्या-2014/2041 की वास्तविक सीमा का स्पष्ट न होना है। सीमा स्पष्ट न होने से दोनों गांवों के ग्रामीणों में लगातार तनाव बढ़ रहा है, जिससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की प्रबल आशंका बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कसियाडीह गांव के लोगों द्वारा जंगल की जमीन पर कब्जा किए जाने के विरोध में बलियारी गांव के लोगों ने उनके मौजा क्षेत्र में पड़ने वाली गरमजुरवा जमीन पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है।
इसका कसियाडीह गांव के लोग विरोध कर रहे हैं, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है। वहीं बलियारी गांव के लोगों का तर्क है कि यदि अतिक्रमणकारी पहले जंगल की जमीन को मुक्त कर दें, तो वे भी गरमजुरवा जमीन पर अतिक्रमण नहीं करेंगे। बाज़ार क्षेत्र और मेले की संवेदनशीलता को देखते हुए ग्रामीणों ने इस जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे को तुरंत रोकने की मांग की है। सौंपे गए आवेदन में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यह मामला बेहद संवेदनशील है। यदि वन विभाग और नागरिक प्रशासन द्वारा इस पर जल्द ही ठोस व त्वरित कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण नहीं हटाया गया और जमीन का स्पष्ट सीमांकन नहीं किया गया, तो ग्रामीण इस मामले को उच्च अधिकारियों और न्यायालय के समक्ष ले जाने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।