सिद्धभूमि पर वंदना और ध्यान से आत्मा में पवित्रता एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है : मुनि प्रमाण सागर महाराज।
SHIKHAR DARPANThursday, July 16, 2026
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मधुबन,शिखर दर्पण संवाददाता।
शंका समाधान प्रणेता राष्ट्रसंत निर्यापक श्रमण मुनि 108 प्रमाण सागर महाराज ने ससंघ शाश्वत तीर्थराज सम्मेद शिखरजी की पावन वंदना संपन्न की। गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन 'विद्यावाणी' ने बताया कि लगभग 27 किलोमीटर की कठिन शिखर वंदना को दो चरणों में पूर्ण किया गया। उन्होंने बताया कि मुनिसंघ ने 15 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे शिखर वंदना का प्रारंभ किया। लगभग 9 किलोमीटर की पदयात्रा के उपरांत चोपड़ा कुंड में रात्रि विश्राम किया। एवं 16 जुलाई प्रातः 5:00 बजे सूर्योदय के समय भगवान पार्श्वनाथ के साथ श्रद्धालुओं ने दर्शन करके अभिषेक एवं शांति धारा की तथा वंदना प्रारंभ की। सभी टोंकों के श्रद्धापूर्वक वंदना करते हुए मुनिसंघ पार्श्वनाथ की टोंक पर पहुँचे,जहाँ मुनि प्रमाण सागर महाराज ने श्रद्धालुओं के साथ चरणों की शांतिधारा की तथा ध्यान-साधना की तथा उपस्थित मुनिराजों एवं श्रद्धालुओं को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया।
इस अवसर पर मुनि प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि सिद्धभूमि पर श्रद्धापूर्वक वंदना करना और एकाग्र भाव से ध्यान लगाना आत्मा की निर्मलता, अंतःकरण की पवित्रता तथा आध्यात्मिक ऊर्जा का महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे पवित्र सिद्धक्षेत्रों में साधना करने से मन को शांति मिलती है, कषायों की तीव्रता घटती है और आत्मकल्याण की भावना प्रबल होती है। उन्होंने कहा कि तीर्थराज सम्मेद शिखरजी केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि अनंत सिद्धों की तप, त्याग और मोक्ष साधना से पावन बनी दिव्य भूमि है। यहाँ श्रद्धा, विनय और समर्पण के साथ की गई वंदना एवं ध्यान साधक के भीतर वैराग्य, संयम और आत्मचिंतन के संस्कारों को जागृत करते हैं तथा मोक्षमार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। मुनि प्रमाण सागर महाराज के साथ मुनि संधान सागर, मुनि सार सागर, मुनि समादर सागर, मुनि रूप सागर महाराज सहित अनेक श्रद्धालुओं ने भी पैदल शिखर वंदना का पुण्य लाभ प्राप्त किया। जैन परंपरा में सम्मेद शिखर तीर्थराज की वंदना का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु श्रद्धा और भावपूर्वक एक बार भी सम्मेद शिखर तीर्थराज की वंदना करता है, उसके लिए आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है तथा वह धर्म, संयम और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा प्राप्त करता है।