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21 से 29 जुलाई तक गुणायतन में होगा 108 मंडलों के साथ सिद्धचक्र महामंडल विधान।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता। 

गुणायतन सम्मेद शिखर तीर्थराज में 21 से 29 जुलाई तक 108 मंडलों के साथ संस्कृत भाषा में निबद्ध सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य आयोजन होगा। यह आयोजन राष्ट्रसंत मुनि प्रमाण सागर महाराज के सान्निध्य में संपन्न होगा। राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन 'विद्यावाणी' ने बताया कि अष्टानिका महापर्व के अवसर पर आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि विधान के सभी मंत्र मुनि के मुखारविंद से उच्चारित किए जाएंगे, जो इस आयोजन की विशेषता है। वहीं 29 जुलाई को राष्ट्रसंत मुनि प्रमाण सागर महाराज एवं मुनि संधान सागर महाराज ससंघ का मंगल चातुर्मास 2026 गुणायतन, सम्मेद शिखर तीर्थराज में संपन्न होगा।

इस अवसर पर मुनि प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि "भाव ही जीवन का मूल तत्व है और अहंभाव को अहोभाव में बदलना ही आत्मकल्याण का मार्ग है।" उन्होंने कहा कि मनुष्य का उत्थान और पतन उसके भावों पर निर्भर करता है। शुद्ध भाव जीवन में शांति, समता और सुख लाते हैं, जबकि दूषित भाव अशांति और दुख का कारण बनते हैं। मुनि श्री ने जीवन में आने वाले चार प्रमुख भाव—अहंभाव, अहोभाव, भक्तिभाव और क्षमाभाव—का उल्लेख करते हुए कहा कि अहंकार मनुष्य को उसके वास्तविक आत्मस्वरूप से दूर कर देता है। उन्होंने कहा कि आत्मज्ञान से ही अहंभाव समाप्त होता है और व्यक्ति समता, संतोष, कृतज्ञता तथा आत्मशांति का अनुभव करता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से जीवन में स्वीकार, मैत्री और क्षमा का भाव अपनाकर आत्मकल्याण के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

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