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झारखंड में नक्सलवाद को बड़ा झटका: 16 नक्सलियों ने हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण, माओवादी संगठन का सुरक्षा घेरा टूटा।

रांची,शिखर दर्पण संवाददाता। 

झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। झारखंड पुलिस मुख्यालय में सोमवार को 16 सक्रिय नक्सलियों ने हथियारों और गोला-बारूद के साथ आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। यह आत्मसमर्पण डीजीपी के निर्देश पर सीआरपीएफ, झारखंड पुलिस और झारखंड जगुआर द्वारा संयुक्त रूप से चलाए जा रहे 'नवजीवन-II' अभियान के तहत कराया गया।आत्मसमर्पण कार्यक्रम में डीजीपी तदाशा मिश्रा सहित पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले 16 नक्सलियों में 14 ऐसे सदस्य हैं, जो माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा और केंद्रीय कमेटी सदस्य असीम मंडल की मारक टीम के प्रमुख सिपहसालार माने जाते थे। पुलिस ने बताया कि ये सभी नक्सली चाईबासा, कोल्हान और सारंडा के दुर्गम इलाकों से पूरी तरह परिचित थे और शीर्ष माओवादी नेताओं के लिए ह्यूमन शील्ड की तरह काम करते थे।

इनके आत्मसमर्पण के बाद माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व का सुरक्षा घेरा कमजोर पड़ गया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 15 लाख रुपये का इनामी नक्सली संतोष महतो भी शामिल है। इसके अलावा तीन जोनल कमांडर और तीन सब-जोनल कमांडर ने भी हथियार डाल दिए। ये सभी पश्चिमी सिंहभूम, लातेहार, लोहरदगा, गिरिडीह, बोकारो तथा ओडिशा के सुंदरगढ़ क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय थे। पिछले दो महीनों में सुरक्षा बलों की रणनीतिक कार्रवाई ने माओवादी संगठन को लगातार कमजोर किया है। गिरफ्तारी, मुठभेड़ और आत्मसमर्पण की 'ट्रिपल स्ट्राइक' से संगठन की कमर टूटती नजर आ रही है। इससे पहले 21 मई को 27 बड़े नक्सल कमांडरों के सामूहिक आत्मसमर्पण को बड़ी सफलता माना गया था। इसके बाद 13 जुलाई को 20 लाख रुपये के इनामी कमांडर रवींद्र गंझू की गिरफ्तारी और 17 जुलाई को 25 लाख रुपये के इनामी अजय महतो उर्फ टाइगर की गिरफ्तारी ने माओवादी संगठन को लगातार बड़े झटके दिए।

वर्ष 2026 में अब तक झारखंड में 93 नक्सलियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि 45 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। वहीं सुरक्षा बलों ने 22 नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया है। इस कार्रवाई का असर पड़ोसी राज्यों में भी देखने को मिल रहा है। इसी दस्ते से जुड़े आठ अन्य नक्सली, जिनमें पांच महिला कमांडर शामिल हैं, छत्तीसगढ़ में पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके हैं। आत्मसमर्पण करने वाले 16 नक्सलियों के पास से सुरक्षा बलों ने 11 हथियार और 1,562 जिंदा गोलियां बरामद की हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का सकारात्मक प्रभाव सामने आ रहा है। अब नक्सलियों के सामने मुख्यधारा में लौटने या फिर कानून का सामना करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।

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