झारखंड में 16 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, पीरटांड़ के 15 लाख के इनामी संतोष महतो समेत दो गिरिडीह के उग्रवादियों ने छोड़ी हिंसा की राह।
SHIKHAR DARPANTuesday, July 28, 2026
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पीरटांड,शिखर दर्पण संवाददाता।
झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का असर लगातार देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में झारखंड के विभिन्न जिलों में सक्रिय कुल 16 माओवादियों ने राज्य की डीजीपी तदाशा मिश्रा के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। पिछले दो महीनों के भीतर यह झारखंड पुलिस की नक्सल विरोधी अभियान में दूसरी बड़ी सफलता मानी जा रही है। आत्मसमर्पण करने वालों में एक रीजनल कमांडर (आरसीएम), तीन जोनल कमांडर (जेडसीएम), तीन सब-जोनल कमांडर (एसजेडसीएम), छह एरिया कमांडर (एसीएम) तथा तीन कैडर स्तर के सदस्य शामिल हैं। इन सभी ने सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला लिया। गिरिडीह जिले के लिए सबसे बड़ी बात यह रही कि आत्मसमर्पण करने वालों में पीरटांड़ प्रखंड के खुखरा थाना क्षेत्र के गम्हरा गांव निवासी 15 लाख रुपये का इनामी नक्सली संतोष महतो उर्फ बासुदेव दा उर्फ गांधी उर्फ दिलीप उर्फ संजय महतो उर्फ बासूकू उर्फ श्याम भी शामिल है।
संगठन में उसका पद रीजनल कमांडर (आरसीएम) था और वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। कुछ दिन पहले ही बोकारो जिले की आनंद विहार पुलिस ने उसके घर पर आत्मसमर्पण को लेकर इश्तिहार भी चिपकाया था। संतोष महतो ने आत्मसमर्पण के दौरान एक इंसास राइफल, पांच मैगजीन और 136 राउंड कारतूस पुलिस को सौंपे। वहीं गिरिडीह जिले के मधुबन थाना क्षेत्र के मोहनपुर-जबरदाहा निवासी एतवारी मांझी उर्फ सोनोत उर्फ संत उर्फ शनिचरवा ने भी आत्मसमर्पण किया। संगठन में उसका पद एरिया कमांडर (एसीएम) था तथा उसके विरुद्ध नौ मामले दर्ज हैं। एतवारी मांझी ने एक इंसास राइफल, पांच मैगजीन और 125 राउंड कारतूस के साथ आत्मसमर्पण किया।
16 नक्सलियों के एक साथ आत्मसमर्पण को राज्य में नक्सली संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इसका सबसे अधिक सकारात्मक प्रभाव पारसनाथ की तराई में बसे पीरटांड़ प्रखंड पर पड़ता दिखाई दे रहा है, जो कभी झारखंड के सबसे अधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता था। एक समय ऐसा था जब पीरटांड़ का नाम सुनते ही लोग भयभीत हो जाते थे, लेकिन लगातार चल रहे पुलिस अभियान, सरकार की पुनर्वास नीति और स्थानीय लोगों के सहयोग से अब यह क्षेत्र धीरे-धीरे नक्सलवाद की गिरफ्त से बाहर निकलता नजर आ रहा है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस आत्मसमर्पण से न केवल नक्सली संगठन की गतिविधियों को बड़ा झटका लगेगा, बल्कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और विकास कार्यों को भी नई गति मिलेगी।