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गिरिडीह के ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर पालगंज में रथ यात्रा महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में, 150 वर्षों से चली आ रही है परंपरा।

पीरटांड,शिखर दर्पण संवाददाता। 

पालगंज स्थित अति प्राचीन एवं ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर में बुधवार को ध्वजा रोपण के साथ ही चार दिवसीय श्री कृष्ण रथयात्रा महोत्सव प्रारंभ हो गया । यहां पर यह बताते चलें कि जेष्ठ पूर्णिमा को भगवान का शाही स्नान कराया जाता है और भगवान 15 दिनों तक बिमार रहते हैं,15 दिनों तक मंदिर का कपाट बंद रहता है । आज ही ध्वजा रोपण के बाद मंदिर का पट खुलता है । इस अवसर पर रथ यात्रा महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में है । 150 वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है। गिरिडीह जिले के एकमात्र ऐतिहासिक एवं अति प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर, पालगंज में वार्षिक रथ यात्रा महोत्सव को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है तथा रथ यात्रा को सफल बनाने के लिए मंदिर समिति और श्रद्धालु कई दिनों से तैयारियों में जुटे हुए हैं। बताया जाता है कि पालगंज स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में पिछले करीब 150 वर्षों से रथ यात्रा महोत्सव का आयोजन निरंतर होता आ रहा है।

यह धार्मिक परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा, आस्था और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ निभाई जाती है। रथ यात्रा के अवसर पर जिले के विभिन्न प्रखंडों के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ स्वामी के दर्शन एवं रथ खींचने के लिए पहुंचते हैं। मंदिर के पुजारी ने बताया कि रथ यात्रा से पूर्व मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है। परंपरा के अनुसार रथ यात्रा के पूर्व संध्या पर मंदिर परिसर में वंशरोपण की रस्म संपन्न होती है। इसके बाद भगवान को विशेष भोग अर्पित कर श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाता है। उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र स्वामी एवं माता सुभद्रा के गर्भगृह का पट बंद कर दिया जाता है। इसके बाद भगवान विश्राम करते हैं और रथ यात्रा से एक दिन पूर्व विधिवत पूजा-अर्चना के साथ मंदिर का पट पुनः खोला जाता है।

पट खुलने के बाद श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। रथ यात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ स्वामी, बलभद्र स्वामी एवं माता सुभद्रा को भव्य एवं सुसज्जित रथ पर विराजमान कर पूरे विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ नगर भ्रमण कराया जाता है। इस दौरान श्रद्धालु "जय जगन्नाथ" के जयघोष के साथ रथ को खींचते हैं। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहता है तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक रथ यात्रा के साक्षी बनते हैं। मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में रथ यात्रा महोत्सव में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की है। प्रशासनिक स्तर पर भी भीड़ को देखते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं किए जाने की तैयारी की जा रही है। जिले की यह ऐतिहासिक रथ यात्रा हर वर्ष आस्था, संस्कृति और धार्मिक परंपरा का अनूठा संगम प्रस्तुत करती है।

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