सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर खूनी संघर्ष दो घायल, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल।
SHIKHAR DARPANThursday, June 11, 2026
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डुमरी,शिखर दर्पण संवाददाता।
अनुमंडल कार्यालय के मुख्य द्वार के समीप सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर बुधवार को दो पक्षों के बीच हुई कहासुनी देखते ही देखते खूनी संघर्ष में तब्दील हो गई। इस हिंसक झड़प में दोनों पक्षों के एक-एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज रेफरल अस्पताल में कराया गया। दोनों पक्षों की ओर से थाना को सूचना दे दी गई है।जानकारी के अनुसार अनुमंडल कार्यालय के मुख्य द्वार के पूरब दिशा में डुमरी पंचायत के बेलदारी टोला निवासी बलवान बिंद वर्षों से एक होटल संचालित करता है। बुधवार को जामतारा निवासी धानेश्वर महतो वहां गुमटी लेकर पहुंच गया और उसी होटल परिसर में अपनी गुमटी रखने का दबाव बनाने लगा। होटल संचालक के विरोध के बाद वहां भीड़ जमा हो गई और बीच-बचाव के प्रयास भी हुए, लेकिन दोनों पक्ष नहीं माने। मामला बढ़ा और गाली-गलौज से होते हुए हरवे-हथियार तक जा पहुंचा। घटना में बलवान बिंद का सिर फट गया जबकि धानेश्वर महतो की ठुड्डी पर गहरी चोट आई।
*अतिक्रमण का दंश झेल रहा है पूरा इलाका* यह घटना महज एक विवाद नहीं, बल्कि डुमरी में बेलगाम अतिक्रमण की उस विकराल समस्या का परिणाम है जिसे प्रशासन वर्षों से नजरअंदाज करता आया है। वनांचल चौक के आसपास, गिरिडीह रोड, बेरमो मोड़, वनांचल चौक से बस स्टैंड इसरी बाजार तक पुरानी जीटी रोड के दोनों किनारों पर सरकारी जमीन और फुटपाथ पर अवैध दुकानें सजी हुई हैं। कुछ तथाकथित दबंग इन सरकारी जमीनों को किराये पर उठाकर मासिक वसूली कर रहे हैं। इस अतिक्रमण के चलते राहगीरों को मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ता है, जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। *8 मई की त्रासदी के बाद भी नहीं जागा प्रशासन* गत 8 मई को इसरी बाजार में इसी अतिक्रमण के कारण हुई एक भीषण दुर्घटना में 5 निर्दोष लोगों की असामयिक मृत्यु हो गई थी और कई घायल हुए थे। उस हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का संकल्प लिया था और शुरुआत भी हुई, लेकिन दूसरे ही दिन मुहिम ठंडे बस्ते में डाल दी गई। नतीजा यह हुआ कि अतिक्रमणकारियों का मनोबल और बढ़ गया और बेधड़क कब्जे जारी हैं।
*अस्पताल की जमीन पर भी चढ़ा अतिक्रमण का बुलडोजर* इतना ही नहीं, पुराने रेफरल अस्पताल जाने वाले मार्ग के समीप अस्पताल की सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण कार्य भी धड़ल्ले से चल रहा है। क्षेत्र के जागरूक युवा आशीष भगत ने 10 जून को सीओ को लिखित आवेदन देकर निर्माण पर तत्काल रोक लगाने और जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की थी। लेकिन खबर लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब सवाल यह है कि आखिर कब तक प्रशासन इस अतिक्रमण माफिया के सामने मौन साधे रहेगा? 5 जिंदगियां जाने के बाद भी यदि तंत्र नहीं जागा, तो जिम्मेदार कौन है?