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सामाजिक बहिष्कार से जूझ रहे परिवार के मुखिया की मौत, दिनभर घर में पड़ा रहा शव।

पीरटांड़,शिखर दर्पण संवाददाता।

मधुबन थाना क्षेत्र के आदिवासी बहुल गांव भोजेदाह में अंधविश्वास और सामाजिक बहिष्कार का एक दर्दनाक मामला सामने आया है। सामाजिक बहिष्कार झेल रहे 55 वर्षीय मुंसी सोरेन की गुरुवार अलसुबह मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, सामाजिक बहिष्कार के कारण दिनभर उनका शव घर में पड़ा रहा और मदद के लिए कोई ग्रामीण आगे नहीं आया। बताया जाता है कि करीब तीन वर्ष पूर्व अंधविश्वास से जुड़े एक मामले में मुंसी सोरेन और उनके परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया था। परिवार का आरोप है कि उन्हें गांव की सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के उपयोग से भी वंचित कर दिया गया था। यहां तक कि खेत-खलिहान पर कब्जे की कोशिशें भी की गईं और गांव से आने-जाने के लिए अलग रास्ता इस्तेमाल करने को मजबूर किया गया।

मृतक की बेटी शांति सोरेन ने बताया कि उनके पिता के साथ मारपीट भी की गई थी और तब से उनका इलाज चल रहा था। आर्थिक तंगी के कारण इलाज और दवाइयां बंद हो गईं। गुरुवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उनकी मौत हो गई। घटना की सूचना मधुबन थाना और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को दी गई, लेकिन परिजनों का आरोप है कि किसी ने तत्काल गंभीरता नहीं दिखाई। देर शाम चिरकी पंचायत के मुखिया सोमरा हेम्ब्रम, मांझी हड़ाम, मधुबन पुलिस और अन्य सामाजिक लोगों के हस्तक्षेप के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो सकी। शांति सोरेन ने अंधविश्वास, ओझा-गुनी प्रथा और सामाजिक बहिष्कार पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर कब तक समाज में ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। उन्होंने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सामाजिक बहिष्कार समाप्त कराने की मांग की है। यह घटना क्षेत्र में अंधविश्वास और सामाजिक बहिष्कार जैसी कुप्रथाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

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