श्रावक और श्रमण—दोनों ही मार्ग आत्मकल्याण के साधन: मुनि प्रमाणसागर महाराज।
SHIKHAR DARPANSunday, May 03, 2026
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पीरटांड,शिखर दर्पण संवाददाता।
गुणायतन परिसर के समवसरण में गणधर पीठ पर विराजमान होकर मुनि प्रमाणसागर महाराज ने धर्म के मूल स्वरूप को स्पष्ट करते हुए कहा कि धर्म के मुख्यतः दो ही मार्ग हैं—श्रावक धर्म और श्रमण धर्म। व्यक्ति या तो पूर्ण त्याग का मार्ग अपनाकर श्रमण बने, अथवा गृहस्थ जीवन में रहकर श्रावक धर्म का पालन करे। मुनि ने श्रावक धर्म का सार बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति मर्यादा, संयम और कुलाचार का पालन करता है, वह स्वभावतः दुराचार से दूर रहता है। उसके जीवन में शुद्ध आचार-विचार, सदाचार और धर्म की प्रतिष्ठा सदैव बनी रहती है। वहीं श्रमण धर्म त्याग, तप और आत्मसाधना का सर्वोच्च मार्ग है, जिसमें व्यक्ति समस्त सांसारिक बंधनों का परित्याग कर मोक्ष मार्ग पर अग्रसर होता है। उन्होंने कहा कि दोनों ही मार्ग आत्मकल्याण के साधन हैं—एक गृहस्थ जीवन में मर्यादा के साथ और दूसरा पूर्ण त्याग के साथ। व्यक्ति जिस भी मार्ग का चयन करे, उसे ईमानदारी, श्रद्धा और संयम के साथ उसका पालन करना चाहिए, तभी वह दुराचार से बचकर आत्मोन्नति की दिशा में आगे बढ़ सकता है। मुनि ने जैन परंपरा में मुनि मुद्रा की महत्ता बताते हुए कहा कि यह केवल बाहरी स्वरूप नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि, संयम और आत्मसाधना का प्रतीक है।
मुनिराज जिनेन्द्र भगवान के सच्चे प्रतिनिधि के रूप में अपने आचरण और उपदेशों से समाज को धर्ममार्ग की ओर प्रेरित करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक जीव को अशुभ कर्मों से निवृत्त होकर शुभ कार्यों में प्रवृत्त होना चाहिए। यही आत्मकल्याण और मोक्ष की दिशा में पहला कदम है। जब मनुष्य अशुभ प्रवृत्तियों से दूर होकर सदाचार को अपनाता है, तभी उसका जीवन सार्थक बनता है। मुनिराजों का जीवन त्याग, तप और साधना का जीवंत उदाहरण है, जो समाज को सही दिशा प्रदान करता है। समवसरण में मुनि प्रमाणसागर महाराज के साथ मुनि संधान सागर, मुनि सार सागर, मुनि समादर सागर एवं मुनि रूप सागर महाराज भी विराजमान थे। उन्होंने उपस्थित श्रावकों के विभिन्न प्रश्नों का समाधान किया। राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने जानकारी देते हुए बताया कि मुनि संघ वर्तमान में गुणायतन में विराजमान है, जहाँ प्रतिदिन प्रातः 7:30 बजे से अभिषेक, शांतिधारा एवं प्रवचन तथा सायं 6:20 बजे से शंका समाधान कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जा रहे हैं।