मनुष्य जीवन मोक्ष प्राप्ति की दुर्लभ नौका, समय का करें सदुपयोग :- मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज।
SHIKHAR DARPANFriday, April 17, 2026
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पीरटांड,शिखर दर्पण संवाददाता।
श्री सम्मेदशिखर तीर्थराज स्थित गुणायतन परिसर में शुक्रवार को ऐतिहासिक पंच दिवसीय जैनेश्वरी दीक्षा समारोह का विधिवत आयोजन जारी है। समारोह में देशभर से जैन समाज के गणमान्य अतिथि एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में पधार चुके हैं। गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रातः 6 बजे से मांगलिक क्रियाओं के साथ कार्यक्रम प्रारंभ होगा। अभिषेक एवं शांतिधारा के उपरांत प्रातः 7:30 से 8:30 बजे तक मुनि श्री का प्रवचन होगा। इसके पश्चात आहारचर्या एवं 9:30 बजे से दीक्षार्थियों की भव्य शोभायात्रा मुख्य मार्ग से होते हुए 10 बजे तक कार्यक्रम स्थल निहारिका से आगे गुणायतन गौशाला के विशाल प्रांगण में पहुंचेगी। प्रातःकालीन धर्मसभा को संबोधित करते हुए गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा, “जगत-जलधि से पार उतरने को यह मानव जीवन अद्भुत नौका है, शाश्वत सुख पाने का यह अनुपम मौका है।
जाग-जाग हे ज्योतिपुंज, यह अवसर बीता जाता; जो क्षण गया—गया, वापस फिर लौटकर नहीं आता।” उन्होंने कहा कि यह संसार एक विशाल समुद्र के समान है, जिसमें जन्म-मरण तथा सुख-दुख की लहरें निरंतर उठती रहती हैं। मनुष्य जीवन उस समुद्र को पार करने वाली दुर्लभ नाव है, जिसके माध्यम से ही मोक्ष अथवा शाश्वत शांति प्राप्त की जा सकती है। मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य जन्म केवल भोग-विलास के लिए नहीं, बल्कि स्थायी सुख—मोक्ष और आत्मशांति—प्राप्त करने का अनोखा अवसर है, जो बार-बार नहीं मिलता। उन्होंने आत्मजागरण का संदेश देते हुए कहा कि समय तेजी से निकल रहा है। यदि अभी नहीं संभले तो यह अनमोल अवसर हाथ से निकल जाएगा। जो क्षण बीत गया, वह पुनः लौटकर नहीं आता, इसलिए प्रत्येक क्षण का सदुपयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पूरी सृष्टि में मनुष्य भव सबसे श्रेष्ठ है। इस मनुष्य पर्याय में जो अवसर प्राप्त होते हैं, वे अन्य किसी योनि में उपलब्ध नहीं होते। यदि इन अवसरों का उपयोग नहीं किया गया तो एक दिन जीवन की ज्योति बुझ जाएगी और लोग “राम नाम सत्य है” कहते हुए विदा कर देंगे। मुनि श्री ने कहा कि जीवित रहते हुए मनुष्य सत्य को सुनना नहीं चाहता, पर मृत्यु के बाद उसी सत्य का स्मरण कराया जाता है।
मोह और आसक्ति के कारण जीव सत्य से दूर रहता है, पर जैसे ही वैराग्य जागता है, जीवन का वास्तविक अर्थ स्पष्ट होने लगता है। मुनि श्री ने कहा कि बार-बार जन्म और बार-बार मरण के चक्र में पड़कर जीव संसार के दुखों का भागी बनता रहा है। इन दुखों से पार उतरने के लिए जीवन की दिशा बदलनी होगी। मनुष्य जीवन दुखों से उद्धार और भवसागर से पार उतरने के लिए मिला है, इसलिए अपने जीवन की महिमा को पहचानते हुए आत्मकल्याण का संकल्प लेना चाहिए, इस अवसर पर मुनि श्री संधांन सागर महाराज सहित शिखरजी तीर्थ पर विराजमान आचार्य ज्ञेय सागर महाराज सहित अन्य मुनिराज एवं देश भर से आये त्यागी वृति तथा दीक्षार्थियों के परिवार जन तथा रिस्तेदार भारी संख्या म़े उपस्थित थे। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया शुक्रवार को प्रातःकाल अभिषेक एवं शांतिधारा के उपरांत दीक्षार्थी भैयाजी एवं उनके परिवार द्वारा गणधर वलय विधान संपन्न किया।
एवं सांयकाल शंकासमाधान कार्यक्रम संपन्न हुआ जिसमें भामाशाह श्री अशोक पाटनी आर के मार्वल एवं प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया अशोकनगर, अनिल भैया अधिष्ठाता इंदौर आश्रम, जबलपुर, दिल्ली, कोलकाता, मुम्बई, आगरा, ललितपुर कानपुर, पश्चिमी बंगाल, राजस्थान, तथा सबसे बड़ी संख्या बुन्देलखण्ड मध्यप्रदेश के भोपाल,सागर,कटनी,दमोह, सतना, बीना विदिशा, आदि मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों तथा संपूर्ण झारखंड एवं छत्तीसगढ़ से श्रद्धालु पधारे है। कार्यक्रम स्थल पर विशाल पांडाल तथा शुद्ध सात्विक भोजन की व्यवस्था की गई है। गुणायतन एवं श्री सेवायतन के समस्त पदाधिकारियों ने विभिन्न प्रदेशों से आए भक्तों का अभिनंदन करते हुए अधिकाधिक संख्या में गुणायतन पधारने की अपील की है तथा असुविधा से बचने हेतु गुणायतन कार्यालय में संपर्क स्थापित करने का अनुरोध किया है।