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उदनाबाद में श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ का तीसरा दिन, भक्ति और गुरु महिमा का दिया संदेश।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।

श्री राम कथा के दौरान परम पूज्य चंदन कृष्ण शास्त्री ने श्री राम कथा के माध्यम से पार्वती जी के विवाह महोत्सव को बड़े विस्तार के साथ वर्णन किया और समाज को यह संदेश दिया शिव सद्गुरु समान है और सद्गुरु की आज्ञा की अवहेलना ही भागवत आज्ञा की अवहेलना मानी जाती है इसलिए गुरु की भक्ति साक्षात शिव की भक्ति मानी जाती है माता सती ने सद्गुरु स्वरूप शिव की आज्ञा का अनुपालन न करते हुए भयंकर कष्ट को पाया और शिव के वियोग को सहन किया इसलिए सद्गुरु का आश्रय प्रकार के जीव शुद्ध बुद्ध मुक्त हो सकता है। वही वृंदावन धाम से पधारी हुई प्रवासी का सुश्री कृष्णा बृजेश्वरी जी ने श्रीमद् भागवत कथा के मध्य ध्रुव और प्रहलाद चरित्र से समाज को यह संदेश दिया की भक्ति का कोई उम्र नहीं होता है और बाल्यावस्था की भक्ति अधिक पुस्ट मानी जाती है जो कि पूरा जीवन स्मृति के स्वरूप में बना रहता है इसलिए भक्ति आरंभ करना हो तो बाल्यावस्था की भक्ति सर्वोपरि भक्ति है। ग्राम पंचायत उदनाबाद में श्री श्री 1008 श्रीमद भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सह राधा कृष्ण प्राण प्रतिष्ठा का विराट आयोजन दिनांक 8.4.2026 से 16.4.2026 तक किया गया है।

जिसके निमित आज 11.4.2026 दिन शनिवार तीसरा दिन अन्न अधिवास कार्यकर्म किया गया।प्रवचनकर्ता श्री चंदन कृष्ण शास्त्री जी वृंदावनधाम, प्रवाचिका सुश्री कृष्ण वृजेश्वरी जी वृंदावन ने उपस्थित सभी स्राधालुओं का मन मोह लिए। श्री राम चरित्र मानस कथा के द्वितीय दिवस में वृंदावन से पधारे हुए पूज्य चंदन कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने श्रोताओं को यह बताया कि कलयुग के कलुशीत प्राणी के क्लेश कैसे दूर हो इसके लिए कलयुग में एक मात्र साधन श्री राम चरित्र मानस हमारे शद ग्रंथ हैं श्रीमद् भागवत श्री रामचरितमानस यह एक सुदृढ़ नौका के समान है जिसका आश्रय लेकर के जीव भवसागर से पार जा सकता है । वहीं वृंदावन धाम से पधारी हुई कथा प्रवासिका का श्री कृष्णा बृजेश्वरी जी ने श्रीमद् भागवत कथा में सती जी के चरित्र को एवं कपिलो पर आख्यान के माध्यम से श्रोताओं को यह संदेश दिया की भक्ति जीवन का एक कर है धर्म के अन्य बहुत सारे साधन है सद्गति के मोक्ष के अन्यत्र बहुत साधन हैं अष्टांग योग के बारे में बताया परंतु भक्ति एक ऐसा साधन है जो बड़े सरलता और सहजता से आश्रय जिसे लेकर के जीव शुद्ध बुद्ध मुक्त हो सकता है।

सफल बनाने के लिए संरक्षक दिलीप उपाध्याय, अध्यक्ष विनय सिंहा, सचिव उदय वर्मा ,कोषाध्यक्ष नरेश यादव,व्यवस्थापक दीपक पंडित, विनोद राणा,सागर वर्मा, अजीत वर्मा, टिंकू वर्मा , सुजीत साव,कृष्ण स्वर्णकार, ,गणेश तुरी, दुर्गा वर्मा,सुवेश यादव, , पूर्ण महतो, संजय राणा, पंचानंद वर्मा, गिरजा वर्मा,संतोष वर्मा, के साथ यज्ञ के सभी गणमान्य व्यक्ति आवाम ग्रामीण उपस्थित रहे।ये जानकारी मीडिया प्रभारी दीपक उपाध्याय ने दिया।आज श्री राम कथा के दौरान परम पूज्य चंदन कृष्ण शास्त्री जी ने श्री राम कथा के माध्यम से पार्वती जी के विवाह महोत्सव को बड़े विस्तार के साथ वर्णन किया और समाज को यह संदेश दिया शिव सद्गुरु समान है और सद्गुरु की आज्ञा की अवहेलना ही भागवत आज्ञा की अवहेलना मानी जाती है इसलिए गुरु की भक्ति साक्षात शिव की भक्ति मानी जाती है माता सती ने सद्गुरु स्वरूप शिव की आज्ञा का अनुपालन न करते हुए भयंकर कष्ट को पाया और शिव के वियोग को सहन किया इसलिए सद्गुरु का आश्रय प्रकार के जीव शुद्ध बुद्ध मुक्त हो सकता है।वही वृंदावन धाम से पधारी हुई प्रवासी का सुश्री कृष्णा बृजेश्वरी जी ने श्रीमद् भागवत कथा के मध्य ध्रुव और प्रहलाद चरित्र से समाज को यह संदेश दिया की भक्ति का कोई उम्र नहीं होता है और बाल्यावस्था की भक्ति अधिक पुस्ट मानी जाती है जो कि पूरा जीवन स्मृति के स्वरूप में बना रहता है इसलिए भक्ति आरंभ करना हो तो बाल्यावस्था की भक्ति सर्वोपरि भक्ति है।


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