“जो तपता है वही चमकता है, और जो चमकता है वही जगत को प्रकाश देता है।” यह उद्गार गुणायतन प्रणेता मुनि प्रमाण सागरजी महाराज ने शंका समाधान कार्यक्रम के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में व्यक्त किया । उन्होंने कहा कि सोना कितना भी कीमती क्यों न हो, जब तक वह अग्नि में नहीं तपता, तब तक कुंदन नहीं बनता। उसी प्रकार साधक जब तक साधना की अग्नि में स्वयं को नहीं तपाता, तब तक उसके भीतर की अशुद्धियाँ समाप्त नहीं होतीं।
*समर्पण से निखरता है व्यक्तित्व:-
मुनि श्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि मिट्टी के पात्र में तेज अग्नि के माध्यम से सोना अपने आपको समर्पित करता है, तभी वह खदान से निकला स्वर्ण अपनी वास्तविक चमक प्राप्त करता है। उसी प्रकार जब शिष्य गुरुचरणों में समर्पित होता है, तो गुरु उसकी आंतरिक अशुद्धियों को दूर कर उसे अपने समान बनाने का प्रयास करते हैं।
आत्मा शुद्ध है, तप से हटती है मलिनता से नहीं ।
उन्होंने कहा कि आत्मा मूल रूप से शुद्ध और अमूल्य है, लेकिन कर्मों की मलिनता उस पर जमी रहती है। उस मलिनता को हटाने के लिए तप आवश्यक है। प्रारंभ में तप कठिन लगता है, पर धीरे-धीरे साधना बढ़ने पर भीतर से तेज प्रकट होने लगता है। जो कठिनाइयों से डरता है, वह कच्चा सोना बना रहता है, और जो तप को स्वीकार करता है, वही कुंदन बन जाता है।
*संकट हमें तोड़ने नहीं, गढ़ने आते हैं:-
मुनि श्री ने कहा कि जीवन में आने वाले संकट और अनुशासन हमें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि गढ़ने के लिए आते हैं। मिट्टी की हांडी और अग्नि के बिना सोना निखर नहीं सकता, उसी प्रकार साधना और तप के बिना आत्मा का तेज प्रकट नहीं हो सकता।
*बाहरी और आंतरिक युद्ध का अंतर:-
उन्होंने कहा कि संसार में दो प्रकार के युद्ध होते हैं—एक बाहरी और एक आंतरिक। बाहरी युद्ध में शस्त्र काम आते हैं, जबकि आंतरिक युद्ध में केवल ज्ञान-शस्त्र ही प्रभावी होता है। मनुष्य का सबसे बड़ा युद्ध किसी दूसरे से नहीं, बल्कि अपने भीतर के क्रोध, मान, माया और लोभ से होता है।
*राम-रावण युद्ध का दृष्टांत:-
मुनि श्री ने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि राम और रावण का युद्ध केवल बाहरी नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म का युद्ध था। राम के पास धनुष-बाण के साथ ज्ञान, मर्यादा और धैर्य का शस्त्र भी था, इसलिए उनकी विजय हुई।
*ज्ञान बने जीवन का शस्त्र:-
उन्होंने कहा कि जीवन में जीतना है तो ज्ञान को शस्त्र बनाना होगा—
क्रोध आए तो ज्ञान कहेगा — शांत रहो
लोभ आए तो ज्ञान कहेगा — संतोष रखो
अहंकार आए तो ज्ञान कहेगा — सब नश्वर है
*शंकाओं का समाधान:-
इस अवसर पर मुनि संधान सागर महाराज ने उपस्थित जनों की शंकाएँ रखीं, जिनका गुरुदेव ने तत्काल समाधान किया।
राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि प्रतिदिन विश्वस्तरीय शंका समाधान कार्यक्रम विविध माध्यम से 135 देशों तक प्रसारित हो रहा है। यह कार्यक्रम प्रतिदिन सायं 6:20 से 7:15 बजे तक आयोजित होता है, जिससे विभिन्न देशों के प्रतिनिधि घर बैठे अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त कर रहे हैं।
पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव 27 अप्रैल से
सिंगापुर के जैन मंदिर में भारत से मूर्तियों की प्रतिष्ठा के निमित्त 27 अप्रैल से 2 मई तक छह दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव गुणायतन परिसर में प्रतिष्ठाचार्य अशोक भैया लिधोरा एवं ब्र. अभय भैया आदित्य के निर्देशन में आयोजित किया जाएगा। गुणायतन तथा श्री सेवायतन के पदाधिकारियों ने देशभर के श्रद्धालुओं से महोत्सव में पधारने की अपील की है। सभी के आवास एवं भोजन की व्यवस्था गुणायतन परिवार द्वारा की गई है।


