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"पाप को पुण्य में बदलो — स्मृति नहीं, आत्मशुद्धि का मार्ग अपनाओ"- मुनि प्रमाण सागर।

पीरटांड,शिखर दर्पण संवाददाता।

संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य गुणायतन, विद्याप्रमाण गुरुकुलम् प्रणेता मुनि प्रमाण सागर महाराज,मुनि  संधान सागर महाराज मुनि समादर सागर, मुनि सार सागर,मुनि रुप सागर महाराज गुणायतन श्री सम्मैदशिखर तीर्थराज पर विराजमान है। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया प्रतिदिन 7 बजे से अभिषेक एवं शांतिधारा 8 बजे से प्रवचन एवं 9 बजे से आहार चर्या संपन्न हो रही है। इस अवसर पर शंकासमाधान के सत्र में मुनि श्री ने शंकाओंं का समाधान करते हुये कहा कि मनुष्य का जीवन स्मृतियों में उलझने के लिए नहीं मिला है, बल्कि अपनी आत्मा को जागृत करने के लिए मिला है, हम बार-बार पापों, और उन दुखद घटनाओं या बिछुड़ चुके लोगों की स्मृति में डूबे रहते हैं, तो मन और अधिक मोह में फँसता जाता है,इसलिए कहा गया है — "पाप की स्मृति मत करो, पाप को पुण्य में बदलो" मुनि श्री ने कहा कि जिसे हम बार-बार याद करते हैं, वह भी आखिर कब तक याद रहेगा? संसार में प्रतिदिन न जाने  कितने लोग आते-जाते हैं, कितने मिलते हैं,और न जाने कितने बिछुड़ते हैं।

यदि हम हर किसी की स्मृति में उलझ जाएंगे तो आत्मा की यात्रा  कैसे आगे  बढ़ेगी? इसलिए बाहरी स्मृति के स्थान पर अपनी आत्मा को याद करो, अपनी चेतना को जगाओ, अपने भीतर शुद्ध भाव जगाओ।"यदि किसी के प्रति प्रेम है,आदर है, तो उसकी स्मृति में रोने के बजाय पुण्य का विधान करो, यह विधान उनके लिए नहीं,अपनी आत्मा की शुद्धि के लिए होनाचाहिए। चाहे चिर विधान करो, चाहे कोई भी पुण्य कार्य करो, भाव यही रहे कि मैं अपने भीतर के पाप को पुण्य में बदल रहा हूँ। यही सच्ची श्रद्धांजलि है, यही सही स्मरण है।किसी को याद भी करो तो मोह से नहीं, उसे आदर से करो। ऐसा स्मरण करो जो हमें आगे बढ़ाए, और हमारे जीवन को ऊँचा उठाए। मोह का कोई समाधान नहीं, मोह केवल बाँधता है; जबकि आदर और पुण्य का भाव  भव बंधन से मुक्त करता है।

इसलिए समझदारी यही है — जो चला गया, उसके पीछे रोने के बजाय कुछ अच्छा कर लो। वह बहुत कुछ छोड़कर गया है,और हम भी कुछ पुण्य छोड़कर जाएँ। पाप की बातों में मन लगाने से अच्छा है पुण्य के मार्ग पर चलना। आत्मा की शुद्धि ही सच्चा मार्ग है, और वही जीवन को सार्थक बनाता है। उपरोक्त जानकारी देते हुये गुणायतन मध्यभारत के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया आगामी 27 अप्रेल से 2 मई तक छै दिवसीय कार्यक्रम सिंगापुर विराजमान होंने जा रही प्रतिमाओं का पंचकल्याणक  संपन्न होंने जा रहा है,उन्होंने पंचकल्याणक अर्थात भगवान के गर्भ, जन्म, तप ज्ञान और मोक्ष तक की समस्त क्रिआओं को दिखाया जाऐगा गुणायतन एवं श्री सेवायतन परिवार के समस्त पदाधिकारियों ने समस्त भारत के श्रद्धालुओं से निवेदन करते हुये कहा कि गुणायतन में सभी के आवास एवं शुद्ध भोजन की व्यवस्था रहेगी, आप सभी पधारने की कृपा करें।

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