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मुनि प्रमाण सागरजी महाराज का मंगल प्रवेश,गुणायतन बना आत्मजागरण का प्रेरक केंद्र।

पीरटांड,शिखर दर्पण संवाददाता।

श्री सम्मेद शिखरजी तीर्थराज पर गुणायतन प्रणेता परम पूज्य मुनिश्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 संधान सागर जी महाराज ससंघ की मंगल अगवानी गुणायतन एवं श्रीसेवायतन परिवार द्वारा मधुबन मोड़ से भव्य शोभायात्रा के साथ प्रारंभ हुई। लगभग 4 किलोमीटर लंबी यह शोभायात्रा प्रातः 7:30 बजे प्रारंभ होकर 9:30 बजे गुणायतन परिसर पहुँची। मार्ग में श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ मुनि संघ का पाद प्रछालन एवं मंगल आरती कर अभिनंदन किया।इस अनुपम यात्रा में श्री सम्मेद शिखर तीर्थराज पर विराजमान आचार्य श्री ज्ञेयसागर जी महाराज, मुनिश्री आदिसागर जी, मुनिश्री भावसागर जी, मुनिश्री प्रकल्प सागर जी, मुनिश्री नियोग सागर जी, मुनिश्री निष्पक्ष सागर जी महाराज सहित आचार्यश्री 108  संभव सागर जी महाराज संघस्थ आर्यिका चैतन्यमति माताजी ससंघ एवं आर्यिका शुभमति माताजी ससंघ सहित ईसरी आश्रम के सभी त्यागी वृति सहित सकल दिगंबर जैन समाज मधुबन ने बेंड बाजों के साथ मुनि श्री की भव्य मंगल अगवानी की, शोभायात्रा में समूचा झारखंड ही उतर आया, रांची, गिरिडीह, हजारीबाग, कोडरमा, गोमिया, साड़म, पेटरवार, रामगढ सहित विभिन्न क्षेत्रों के श्रद्धालु सम्मिलित हुए।

वहीं मध्यप्रदेश के इंदौर, भोपाल, सागर, जबलपुर  विदिशा, कटनी, बुढार, छत्तीसगढ़ के कुनकुरी, रायपुर, राजनांदगांव,उत्तर प्रदेश के ललितपुर, कानपुर, राजस्थान के कामा जिले के अनेक श्रद्धालु पधारे। उन्होंने न केवल क्षेत्र के दर्शन किये बल्कि इस ऐतिहासिक धर्मयात्रा में सहभागिता भी की।धर्मसभा में गुणायतन प्रणेता परम पूज्य मुनिश्री प्रमाण सागर जी महाराज ने कहा कि संत का आगमन मन को अपार प्रसन्नता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि “गुणायतन आत्मा से परमात्मा की यात्रा का पावन स्थल है। यह कोई साधारण तीर्थ नहीं, बल्कि आत्म जागरण की जीवंत अनुभूति है। यहाँ श्रद्धा, साधना और संवेदना के साथ धर्म, दर्शन और विज्ञान का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।”उन्होंने कहा कि यह तीर्थ आत्मा को उसकी दिव्यता का बोध कराते हुए मोक्षमार्ग की ओर उन्मुख करता है,जहाँ तीर्थयात्रा भी आत्मयात्रा बन जाती है। सिद्धभूमि की इस पावन वायु में भावों से सिद्धारोहण का अनुभव संभव है। यहाँ परंपरा की गहराई और तकनीक की ऊँचाई का अद्भुत संगम धर्म को जीवंत अनुभव में बदल देता है।

गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि मुनि संघ की मंगल अगवानी में देशभर से गुणायतन के पदाधिकारी, संरक्षक एवं ट्रस्टी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से सुशीला अशोक पाटनी (किशनगढ़), दिनेश पापड़ीवाल (जयपुर), राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद काला (कोलकाता),  कन्हैयालाल सेठी, अशोक पांडया (महामंत्री) सुभाष जैन (सीईओ),एन एल. जैन,कोषाध्यक्ष असित बैनाड़ा, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी वीरेन्द्र छाबड़ा (बेंगलुरु), पप्पू भाई कोडरमा,आवास व्यवस्थापक संजय जैन,विजय लुहाड़िया हजारीबाग, सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।मुनिश्री ने मुनि संघ के आहार-विहार की व्यवस्था में सहयोग देने हेतु सुनीता दीदी (कानपुर), विवेक जैन कुनकुरी  (जसपुर) तथा 1600 किमी से अधिक के मंगल विहार में चौका व्यवस्था संचालित करने हेतु चंद्रकला जैन (रांची) का विशेष उल्लेख करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया। साथ ही मंगल विहार में सहयोग करने वाले सभी कार्यकर्ताओं का सम्मान गुणायतन परिवार द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन बाल ब्रह्मचारी अशोक भैया लिधोरा एवं बाल ब्रह्मचारी अभय भैया ने किया।

आगामी 18 अप्रैल को क्षुल्लकश्री समादर सागर महाराज, बाल ब्रह्मचारी रुपेश भैया एवं बाल ब्रह्मचारी शारांश भैया की जैनेश्वरी दीक्षा का कार्यक्रम प्रातः 10 बजे से संपन्न होगा। पंच दिवसीय इस महामहोत्सव में देशभर से गुरुभक्त श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया गया है। आवास एवं भोजन व्यवस्था गुणायतन एवं श्रीसेवायतन परिवार द्वारा की जा रही है। मुनिश्री ने बताया कि गुणायतन जैन सिद्धांतों की एक वैज्ञानिक प्रयोगशाला है, जहाँ आधुनिक तकनीक के माध्यम से धर्म को सजीव अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। निर्माणाधीन अनुभव केंद्र में एनिमेशन, होलोग्राम, 9D स्क्रीन, 270 डिग्री प्रोजेक्शन तथा गुणस्थान से लेकर मोक्षगमन तक की अद्भुत झांकियाँ प्रदर्शित होंगी। यहाँ चतुर्गति से मोक्ष तक की आत्मयात्रा, समवसरण के दृश्य, भगवान की दिव्यध्वनि तथा श्रीविहार का जीवंत अनुभव श्रद्धालुओं को नव प्रेरणा प्रदान करेगा।“गुणायतन” एक ऐसा दिव्य सदन है जहाँ आत्मा से परमात्मा की सम्पूर्ण यात्रा का प्रत्यक्ष साक्षात्कार होता है। पंचायतन शैली का दिव्य जिनमंदिर, साधना एवं स्वाध्याय हेतु शांत साधु-वसतिका, तथा श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त आवास इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। यह तीर्थ परंपरा की जड़ों से जोड़ते हुए तकनीक के माध्यम से आत्मबोध और जागृति का सजीव केंद्र बन रहा है।

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