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मधुबन चिरकी में पेयजल संकट गहराया, ग्रामीणों में आक्रोश — करोड़ों की योजना बनी ‘हाथी का दांत’।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।

अनिलेश गौरव.

जैनियों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मधुबन चिरकी क्षेत्र इन दिनों भीषण पेयजल संकट से जूझ रहा है। मधुबन चिरकी ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना पिछले कई दिनों से ठप पड़ा है, जिससे इलाके में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। गर्मी के इस तीखे मौसम में हालात और भी गंभीर हो गए हैं, जहां लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बराकर नदी से मधुबन तक करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई यह महत्वाकांक्षी योजना वर्ष 2012 में शुरू की गई थी। लेकिन शुरूआत से ही यह योजना अनियमितता और तकनीकी खामियों की शिकार रही है। स्थिति यह है कि आज तक एक साल भी लगातार ग्रामीणों को सुचारू रूप से पानी की आपूर्ति नहीं मिल पाई है। हर साल लगभग छह महीने यह योजना बंद ही रहती है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ जाती है।

वर्तमान में भी करीब एक सप्ताह से जलापूर्ति पूरी तरह ठप है। ग्रामीणों का कहना है कि वे लगातार विभागीय अधिकारियों और संबंधित कर्मियों से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है। “आज चालू होगा, कल चालू होगा” की बातें सुनते-सुनते लोग अब तंग आ चुके हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) को भी इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस पहल नहीं हुई। वहीं, योजना से जुड़े समिति के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों से भी जलापूर्ति बहाल करने की मांग की गई, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।

पेयजल संकट के चलते ग्रामीणों को दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। एक तरफ भीषण गर्मी लोगों को झुलसा रही है, वहीं दूसरी ओर पीने के पानी की किल्लत ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द इस योजना को चालू कराने और स्थायी समाधान निकालने की मांग की है, ताकि हर साल इस तरह की परेशानी से निजात मिल सके। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार विभाग इस गंभीर समस्या पर कब तक संज्ञान लेकर राहत पहुंचाता है।

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