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योग्य संतान को जन्म देना कर्म नहीं, नौ माह की तपस्या" मुनि प्रमाण सागर।

पीरटांड़,शिखर दर्पण संवाददाता।

गुणायतन में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के दूसरे दिन गर्भ कल्याणक उत्तरार्ध पर आयोजित प्रातःकालीन धर्मसभा में मुनि प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि योग्य संतान को जन्म देना केवल एक मां का कर्म नहीं, बल्कि नौ माह की तपस्या है। उन्होंने “संस्कृति और संस्कार” विषय पर चर्चा करते हुए गर्भ संस्कार की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। मुनि ने कहा कि आज अनचाहे शिशु का गर्भपात एक फैशन बनता जा रहा है, जबकि गर्भपात केवल हत्या नहीं, बल्कि करुणा और मातृत्व की भी हत्या है। ऐसा पापकर्म कभी नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी से ऐसा हो गया हो तो उसे प्रायश्चित अवश्य लेना चाहिए, अन्यथा जीवन में अशांति बनी रहती है। उन्होंने कहा कि जब तीर्थंकरों के लिए भी गर्भ संस्कार आवश्यक माने गए हैं, तो सामान्य मनुष्य के लिए उनकी आवश्यकता और भी अधिक है। “संस्कार भावनाओं का पुंज, प्रवृत्तियों की छाप और व्यवहार का प्रतिबिंब है।

जैसी भावनाएं होंगी, वैसे ही संस्कार संतान में विकसित होंगे।” उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे तेज अग्नि भी हवा के बिना मंद पड़ जाती है, वैसे ही श्रेष्ठ संस्कार भी सजगता के अभाव में कमजोर हो जाते हैं। मुनि ने जीवन के चार स्तंभ—संस्कार, सजगता, सक्रियता और संगति—बताते हुए कहा कि गर्भ संस्कार, गृह संस्कार, समाज संस्कार और धर्म संस्कार से इसकी शुरुआत करनी चाहिए। उन्होंने सिंगापुर से आए एक परिवार का उदाहरण देते हुए बताया कि चिकित्सकों ने पांचवें महीने में शिशु के न बचने की आशंका जताई थी, लेकिन गर्भ संस्कार और सकारात्मक भावना योग के परिणामस्वरूप सातवें महीने में स्वस्थ जुड़वा बच्चों का जन्म हुआ, जो वर्तमान में स्वस्थ हैं। उन्होंने आधुनिक पीढ़ी को संदेश देते हुए कहा कि संगति का संस्कारों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अच्छी संगति से ही संस्कार सुरक्षित रहते हैं और श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण होता है। सिंगापुर और मलेशिया के जैन परिवारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहां लगभग 285 परिवार होने के बावजूद सभी संस्कारित हैं।

यह संस्कार उन्हें अपने माता-पिता से प्राप्त हुए हैं, अन्यथा आज की प्रोफेशनल जीवनशैली में इतने प्रबल पुण्य संस्कार दुर्लभ हैं। इस अवसर पर मुनि संधान सागर महाराज सहित पूरा संघ मंचासीन था। कार्यक्रम प्रतिष्ठाचार्य अशोक भैया एवं अभय भैया के निर्देशन में संचालित हो रहा है। गुणायतन मध्यभारत के प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के दूसरे दिवस प्रातः 5:45 बजे भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा के उपरांत गर्भ कल्याणक की पूजन संपन्न हुई। दोपहर 3:30 बजे मुनि के प्रवचन तथा सायंकाल 6:20 बजे विश्व प्रसिद्ध शंका-समाधान कार्यक्रम आयोजित हुआ। तत्पश्चात सौधर्म इंद्र का राजदरबार सजा, जिसमें इंद्रलोक से देवियों द्वारा माता मरुदेवी की सेवा का शास्त्रोक्त कथानक प्रमुख पात्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। दोपहर में माता मरुदेवी की गोद भराई की रस्म भी सम्पन्न हुई, जिसमें ललित कला एवं हास्य के दृश्य दर्शाए गए। 29 अप्रैल को प्रातःकाल आदि प्रभु का जन्म कल्याणक मनाया जाएगा। सभी कार्यक्रम गुणायतन परिसर में ही आयोजित किए जा रहे हैं।

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