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नगरनिगम अतिक्रमण के मामले डबल रोल में है -राजेश सिन्हा।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।

गिरिडीह में अतिक्रमण मामला चरम पर है,इसके पीछे नगरनिगम का कड़ा रुख नहीं होना,जहां स्थान दिया गया है फुटपाथ पर दुकान लगाने का वहां नहीं भेज नहीं पाते है नगरनिगम कर्मी,हम जानते है कि फुटपाथ में लगाने वाले दुकानों से रोज नगरनिगम के संवेदक के द्वारा पैसे लिए जाते है,नगरनिगम का रसीद भी देते है,अब प्रश्न है नगरनिगम के अधिकारियों से की जब पता है अतिक्रमण है तो फुटपाथ लगाने क्यों देते है,मतलब साफ है संवेदक और नगरनिगम के कर्मियों में बेहतर तालमेल है। 9 अप्रैल को शायद नगरनिगम की पहली बैठक है,जिसमें सभी प्रतिनिधि एक जुट होंगे उसमें सभी मुद्दे पर विशेष चर्चा कर लागू हो,शहर के लिए जरूरी है। अब गौर करे तो नगरनिगम के कर्मी काली बाड़ी से टावर चौक के पास हमेशा अतिक्रमण अतिक्रमण कर फोटो मीडिया में छपवाते है,उनको बड़ा चौक का रोड पर अतिक्रमण नहीं दिखता है,पचंबा से गिरिडीह मुस्लिम होते हुए मकतपुर होते हुए बरगंडा सभी जगह लगातार समझाने की जरूरत है या फिर फुटपाथ का वाले को ठेकेदारी नहीं देनी चाहिए।

जिला प्रशासन खासकर गिरिडीह उपायुक्त के साथ नगरविकास मंत्री,सभी विभागीय अफसर के साथ सभी जनप्रतिनिधि के साथ बैठक कर कुछ ठोस प्लान तैयार करना होगा,वरना सिर्फ हरेक महीने अतिक्रमण का एक फोटो आयेगा समस्या का समाधान नहीं होगा। एक और बात है गिरिडीह में 18 साल से कम उम्र वाले टोटो चलाने वाले कहर बहुत बढ़ गया है,उसको भी जांच की जरूरत है,अलग अलग जॉन का रूट बनाने की आवश्यकता है,जाम की समस्या से निजाद मिलेगा,डीटीओ ऑफिस को सजग होना पड़ेगा,डीटीओ ऑफिस को यह पता होना चाहिए गिरिडीह में कितने टोटो है यह भी जानकारी जरूरी है,सभी को रूट तय कर चलाना चाहिए,ज्ञात हो कि इसमें भी संवेदक को दिया गया है,नगरनिगम के द्वारा इसलिए कोई रूट तय नहीं हो पा रहा है। गिरिडीह के जाम और अतिक्रमण मामले को सुधारने के लिए 36 वार्ड पार्षद है,एक डिप्टी मेयर है और एक मेयर है इतने अफसर है इसके बाद भी गिरिडीह का हाल बेहाल है,यदि नहीं सुधार हुआ तो आगे भी सुधार की गुंजाइश नहीं है।

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