परसनाथ पर्वत पर भीषण आग, गांवों तक पहुंची लपटें — पर्यावरण और आस्था पर गहराया संकट।
SHIKHAR DARPANWednesday, April 22, 2026
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गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।
अनिलेश गौरब
झारखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल,जैनियों के विश्व प्रशिद्ध तीर्थ स्थल परसनाथ और आदिवासीयों का मरांग बुरू इस समय एक गंभीर संकट से जूझ रहा है। अपनी प्राकृतिक छटा, घने जंगलों और शांत वातावरण के लिए जाने, जाने वाला यह इलाका पिछले कुछ दिनों से भीषण आग की चपेट में है। हालात इतने चिंताजनक हो चुके हैं कि आग की लपटें पारसनाथ पर्वत पर बसे गांव तक पहुँच गया है। परसनाथ पर्वत पर दूर से ही से आग की लपटे साफ दिखाई दे रहा है, हवा में धुएं की घुटन है और स्थानीय लोगों के बीच भय का माहौल लगातार गहराता जा रहा है। आग की चपेट में जलकर कई जंगली पेड़ पौधे एवं जड़ी बूटी जल कर खाक हो रहे हैं। कई जीव जंतु भी जल कर मर रहे हैं। वन विभाग और प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठाए जा रहे हैं यह मामला अब गंभीर परीक्षा बन चुका है।
पिछले कुछ दिनों के लंबे अंतराल के बावजूद आग पर नियंत्रण के ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि वन विभाग, अलर्ट सिस्टम और आपदा प्रबंधन की सक्रियता समय पर क्यों नहीं दिखी, और क्या इस संकट से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन व फंडिंग उपलब्ध कराई गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आग पर नियंत्रण के प्रयास होते, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। अब हर बीतते दिन के साथ खतरा और बढ़ता जा रहा है। * पारसनाथ मकर संक्रांति मेला समिति के सदस्यों के द्वारा हर वर्ष आग बुझाने के लिए कई प्रयास किए जाते हैं। जिससे जंगल में लगे आग पर काबु पाया जाता है। इस आग पर काबू पाने के लिए मधुबन के कई संस्थाएं समिति की मदद भी करती है। लेकिन इसके बावजूद यह सवाल खड़ा होता है कि हर वर्ष पर्वत पर आग कैसे लगता है और क्यों लगाया जाता है।
* वही यह सवाल भी खड़ा होता है कि आखिर जैनियों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल सम्मेद शिखर होने के बावजूद यहां जैन संस्थाओं के द्वारा आग बुझाने व आग न लगे इस पर आखिर क्यों नही कोई ठोस कदम उठाए जाते है। हलाकि मधुबन के कई संस्थान है जो इस विषय पर गंभीर है और प्रशासनिक पदाधिकारी को कई बार इसकी लिखित और मौखिक सूचना भी दी है साथ ही आसपास के लोगों के साथ मिलकर आग बुझाने का काम भी करती है। *मेला समिति के सदस्य नरेश महतो ने झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य सोनू से मांग की है कि कई दिनों से पूरा पारसनाथ/मारंग बुरु जल रहा है।जिससे काफी जीव प्राणी के साथ-साथ बेस कीमती जड़ी बूटियां जल के राख हो जा रहे हैं।वन विभाग पहाड़ पर लगे आग को बुझाने में लगा हुआ हैं।लेकिन आग इतना बड़ा हिस्सा में लगा हुआ कि आग पर काबू पाने में मुश्किल हो रहा हैं। क़्योंकि विभाग के कर्मी बहुत कम है जिससे आग बुझाने में काफी परेशानी हो रहें हैं । आग से कैसे निपटारा हो इस पर पहल करने की कृपा करें। *पारसनाथ पर्वत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां प्रशासन की निष्क्रियता इसे बड़ी त्रासदी की ओर धकेल सकती है। यह केवल एक खबर नहीं, बल्कि एक गंभीर चिंता का विषय है।