विदेश में जिनालय स्थापना का सही लाभ लें, धर्म से जुड़ेंगे तो व्यापार भी बढ़ेगा: मुनि प्रमाणसागर।
SHIKHAR DARPANSunday, April 26, 2026
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पीरटांड़,शिखर दर्पण संवाददाता।
गुणायतन परिसर में सोमवार से सिंगापुर और मलेशिया से आए श्रावकों द्वारा सिंगापुर में निर्मित जिनालय में चौबीसी विराजमान कराने हेतु जिनबिंबों की प्रतिष्ठा कार्यक्रम का शुभारंभ होने जा रहा है। यह आयोजन मुनि प्रमाण सागर महाराज के ससंघ सान्निध्य में संपन्न होगा। गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने जानकारी देते हुए बताया कि 27 अप्रैल सोमवार को प्रातः 5:45 बजे मंगलाष्टक के साथ ध्वजारोहण, पात्र शुद्धि, मंडप शुद्धि एवं गर्भकल्याणक की क्रियाओं के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी। दोपहर 3:30 बजे आयोजित “आराधना सार ग्रंथ” की कक्षा में मुनि प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि निश्चय आराधना से ही केवलज्ञान की प्राप्ति संभव है। उन्होंने बताया कि केवलज्ञान आत्मा की पूर्ण जागृत अवस्था है, जो बाहरी साधनों से नहीं बल्कि आत्मानुभूति और आंतरिक शुद्धि से प्राप्त होती है। जब साधक निश्चय आराधना में स्थिर होता है, तो अज्ञान का अंधकार समाप्त होकर आत्मा का वास्तविक स्वरूप प्रकट होता है।
मुनि श्री ने कहा कि मोक्ष का आधार बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि आंतरिक साधना है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे बीज को वृक्ष बनने के लिए उसकी क्षमता, जल-मिट्टी का निमित्त और समय आवश्यक होता है, वैसे ही आत्मा को मोक्ष के लिए शुद्ध परिणाम, साधना और उपयुक्त काल का संयोग चाहिए। संध्याकालीन शंका-समाधान सत्र में विदेश से आए श्रावकों ने जिनालय के सही उपयोग को लेकर प्रश्न किए। इस पर मुनि श्री ने सुझाव दिया कि यदि मंदिर दूर हो तो घर-घर नियमित पूजन और स्वाध्याय की परंपरा शुरू करें तथा सप्ताह में कम से कम एक दिन सामूहिक अभिषेक और पूजन आयोजित करें। महिलाओं को भक्ति मंडली बनाकर भजन-स्तवन, मासिक प्रतिक्रमण और स्वाध्याय करने की प्रेरणा दी गई। उन्होंने कहा कि बच्चों को णमोकार मंत्र, पंच परमेष्ठी और तीर्थंकरों का परिचय अवश्य कराया जाए। युवाओं को जोड़ने के लिए सोशल मीडिया, ऑनलाइन समूह, चर्चा सत्र और धार्मिक क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित करने की भी सलाह दी गई।
मुनि श्री ने कहा कि धार्मिक वातावरण से मानसिक शांति मिलती है और शांति से लिए गए निर्णय जीवन व व्यवसाय दोनों में सफलता दिलाते हैं। व्यापार में सत्य, विनय और विश्वास बनाए रखने, कर्मचारियों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करने तथा लाभ का एक भाग धर्म और सेवा में लगाने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिदिन कार्य प्रारंभ करने से पहले णमोकार मंत्र का जाप करने से स्थिरता और विश्वास बढ़ता है। महिलाओं की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि वे साप्ताहिक स्वाध्याय समूह बनाएं, बच्चों को संस्कार दें और त्योहारों पर धार्मिक आयोजन करें। उन्होंने कहा कि विदेश में भगवान की स्थापना एक बड़ा सौभाग्य है। यदि नियमित भक्ति, युवाओं की भागीदारी और महिलाओं की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित हो, तो धर्म के साथ-साथ समाज आर्थिक रूप से भी सशक्त बनेगा। कार्यक्रम में मुनि संधान सागर, मुनि सार सागर, मुनि समादर सागर एवं मुनि रूप सागर भी मंचासीन रहे। संचालन अशोक भैया एवं अभय भैया आदित्य ने किया।