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जैनियों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल मधुबन में तीन दिवसीय होली महोत्सव का आयोजन//उमड़ते है हजारों श्रद्धालु।

पीरटांड़,शिखर दर्पण संवाददाता।

जैनियों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मधुबन में होली महोत्सव बड़े ही धूमधाम और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। तीन दिवसीय इस विशेष आयोजन में देश के कोने-कोने से हजारों जैन तीर्थयात्री मधुबन पहुंच रहे हैं । यहां यह बता दें कि इस वर्ष यह महोत्सव चार दिनों तक चलेगा । रविवार से महोत्सव प्रारंभ होकर बुधवार तक चलेगा ।  पूरा मधुबन रंग-बिरंगी रोशनी से दुल्हन की तरह सजाया गया है, भक्ति व उल्लास का अद्भुत संगम देखने को यहां मिलेगा । मधुबन स्थित जैन श्वेताम्बर सोसायटी के भोमिया बाबा मंदिर, भोमिया जी भवन ,श्री धर्म मंगल जैन विद्यापीठ, तलेटी तीर्थ सहित विभिन्न श्वेताम्बर मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। यहां होली रंगों से नहीं बल्कि फूलों से खेली जाती है।यहाँ यह बता दे कि बाबा भोमिया के दरबार में रंग-बिरंगे फूल उड़ाकर श्रद्धालु अपनी आस्था प्रकट करते हैं। होली के अवसर पर बाबा भोमिया जी की आरती उतारने के लिए पारंपरिक रूप से बोली लगाई जाती है।

वर्षों पुरानी इस परंपरा के तहत श्रद्धालु बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं और बोली की राशि लाखों रुपयों तक पहुंच जाती है। अगजा के दिन भोमियां बाबा मंदिर में भव्य रात्रि जागरण का आयोजन किया जाता है, जिसमें विभिन्न राज्यों से आई भजन मंडलियां भाग लेती हैं। जिसमें मधुबन मंडल, मित्र मंडल, डागा मंडल, आदेश्वर मंडल, वीर मंडल, गौतम मंडल , श्वेताम्बर मंडल, महावीर मंडल सहित कई मंडलियां अपनी भजन की प्रस्तुति भक्ति भावना से करती है । वातावरण को भक्तिमय बना देती हैं। लॉटरी के माध्यम से मंडलियों को मंच पर आमंत्रित किया जाता है और सभी को अपनी कला दिखाने का अवसर दिया जाता है। प्रथम द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर रहने वाले मंडलियों को पुरस्कृत भी किया जाता है । पारसनाथ पर्वत की वंदना और अर्चना के लिए भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। होली के इस अवसर पर जहां अन्य स्थानों पर लोग अवकाश मनाते हैं, वहीं मधुबन के व्यापारी और स्थानीय लोग इस पर्व को विशेष अवसर के रूप में देखते हैं।

दूर-दराज से आए श्रद्धालु जमकर खरीदारी करते हैं, जिससे यहां का कारोबार पूरे साल की तुलना में कई गुना बढ़ जाता है। दुकानदारों, डोली मजदूरों, गोदी मजदूरों और दैनिक श्रमिकों को इस दौरान पर्याप्त रोजगार मिलता है।महोत्सव को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मधुबन में वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू की गई है, जिससे जाम की समस्या से राहत मिल सके। विशेष बात यह है कि जहां देशभर में होली एक दिन मनाई जाती है, वहीं मधुबन में स्थानीय लोग एक सप्ताह बाद पारंपरिक तरीके से होली मनाते हैं। फूलों की खुशबू, भजनों की गूंज और श्रद्धालुओं की आस्था से सराबोर मधुबन इन दिनों आध्यात्मिक उत्सव का केंद्र बना हुआ है। सभी कोठीयों में कमरा बुकिंग के अनुसार इस वर्ष 40 से 50 हजार के बीच तीर्थयात्रियों की आने की संभावना है ।

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