गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।
प्रांतीय योजना के अंतर्गत सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, भलपहरी में सोमवार को विद्यालयी वार्षिक आचार्य कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया। कार्यक्रम में समिति सदस्य सुरेंद्र यादव, मुख्य प्रशिक्षक पूर्व आचार्य सह मीडिया प्रभारी राजेंद्र लाल बरनवाल तथा प्रधानाचार्य जीतन पंडित ने उपस्थित आचार्य-दीदी को मार्गदर्शन दिया।इस अवसर पर प्रधानाचार्य जीतन पंडित ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका मुख्य लक्ष्य शिक्षकों के शिक्षण कौशल को विकसित करना एवं छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए उन्हें बेहतर रूप से तैयार करना है।
मुख्य प्रशिक्षक राजेंद्र लाल बरनवाल ने बताया कि विद्या भारती, झारखंड द्वारा आयोजित यह वार्षिक कार्यशाला आचार्यों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जो भारतीय संस्कृति, मूल्य एवं पंचपदीय शिक्षण पद्धति पर आधारित है। इसमें बीते सत्र की समीक्षा के साथ आगामी शैक्षणिक सत्र की विस्तृत योजना तैयार की जाती है।कार्यशाला में पंचपदी शिक्षण पद्धति, विद्या भारती के पांच केंद्रीय विषय, सुलेख एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि वंदना सभा शिशु मंदिर का प्राण है और बचपन में दिए गए संस्कार ही व्यक्ति के भविष्य का निर्माण करते हैं। इसलिए शिक्षा का आधार चरित्र एवं संस्कार होना आवश्यक है।
कार्यक्रम में विद्यालय के सभी आचार्य-दीदी उपस्थित रहे और कार्यशाला को सफल बनाने में सक्रिय सहभागिता निभाई।