मनरेगा को मूल रूप में बहाल करने की मांग, मजदूरों की एकजुट आवाज़//मनरेगा मजदूर मंच के बैनर तले मनाया गया मनरेगा दिवस।
SHIKHAR DARPANMonday, February 02, 2026
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जमुआ,शिखर दर्पण संवाददाता।
सोमवार को जमुआ प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत धरमपुर के ग्राम श्यामसिंह नावाडीह में मनरेगा मजदूर मंच के बैनर तले मनरेगा दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के प्रदेश संयोजक मो. आलम अंसारी ने की। इस मौके पर भारत ज्ञान विज्ञान समिति के प्रदेश महासचिव श्री विश्वनाथ सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मजदूरों और ग्रामीणों की भागीदारी रही।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वनाथ सिंह ने कहा कि मनरेगा कानून मजदूरों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी देता है, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वीबी-जी रामजी योजना में 125 दिन का जो दावा किया जा रहा है, वह केवल एक धोखा और जुमला है। उन्होंने कहा कि इस योजना में केंद्र सरकार केवल 60 प्रतिशत व्यय वहन करने की बात कर रही है, जबकि 40 प्रतिशत की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर डाल दी जा रही है, जो व्यवहारिक नहीं है और अंततः इसका खामियाजा मजदूरों को भुगतना पड़ेगा।प्रदेश संयोजक मो. आलम अंसारी ने अपने संबोधन में कहा कि मनरेगा दुनिया का सबसे बड़ा और मजदूर हितैषी कानून रहा है, जिसने काम के अधिकार की गारंटी दी। लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार इस कानून को कमजोर कर मजदूरों के अधिकारों और किसानों के लिए बन रहे संसाधनों को खत्म करने की साजिश कर रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मनरेगा को खत्म करने या कमजोर करने की किसी भी कोशिश को मजदूर बर्दाश्त नहीं करेंगे। मौके पर मौजूद मजदूरों ने भी अपनी पीड़ा साझा की।
मजदूरों ने एक स्वर में मांग की कि मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए और वीबी-जी रामजी योजना जैसे छलावों को वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि मनरेगा में तकनीकी अड़चनें डालकर इसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। पहले की तरह मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था को ही लागू रखा जाए, न कि एनएमएमएस (NMMS) जैसी जटिल और अव्यवहारिक तकनीकी प्रणाली मजदूरों पर थोपी जाए।कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि मनरेगा केवल रोजगार का साधन नहीं,बल्कि जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा, किसानों के हित और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाला कानून है। यह कानून सीधे तौर पर काम के अधिकार की गारंटी देता है, इसलिए इसे कमजोर नहीं बल्कि और सशक्त किया जाना चाहिए।कार्यक्रम के दौरान मजदूरों ने जोश के साथ नारे लगाए—रोजी-रोजगार का सवाल है, मनरेगा हमारा ढाल है।काम के अधिकार की गारंटी, मनरेगा को वापस करो” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।इस अवसर पर बीजीवीएस के प्रखंड सचिव सह मजदूर मंच के दिवस कुमार, प्रखंड उप सचिव सह मजदूर मंच के सदस्य सरताज परवेज, धरमपुर के मुखिया लोकनाथ हजरा, संतोष कुमार साव, अनिल कुमार, उमेश कुमार चंद्रवंशी, रघुनाथ सिंह, तुलो राम, बहादुर सिंह, बुल्लू कुमार, भरत महतो, केदार हजरा, छोटू हजरा, एतवारी महतो, अजय वर्मा, नकुल वर्मा, भीम महतो, शब्बीर अंसारी सहित बड़ी संख्या में मजदूर और ग्रामीण उपस्थित थे।कार्यक्रम का समापन मनरेगा को मूल रूप में बहाल करने और मजदूर अधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ किया।