जमुआ में अवैध पत्थर खनन का बोलबाला,नदी पर बनाई गई अस्थायी सड़क।
SHIKHAR DARPANFriday, February 13, 2026
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जनुआ,शिखर दर्पण संवाददाता।
जमुआ में अवैध पत्थर खनन का बोलबाला, नदी पर बनाई गई अस्थायी सड़क; विरोध करने पर बाउंसर तैनात जमुआ प्रखंड क्षेत्र इन दिनों अवैध पत्थर खनन का केंद्र बनता जा रहा है। प्रखंड के कई इलाकों में अवैध पत्थर खदानें खुलेआम संचालित हो रही हैं। वहीं जिन खदानों को लीज प्राप्त है, वहां भी नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। न तो पर्यावरण मानकों का पालन हो रहा है और न ही सुरक्षा नियमों का। जैसे-तैसे पत्थर निकालकर कारोबार संचालित किया जा रहा है।बताया जाता है कि लताकी पंचायत से महतोटांड़ जाने के रास्ते में धंधेबाजों ने बीच नदी में पत्थर डालकर अस्थायी सड़क बना ली है, जिससे भारी वाहनों की आवाजाही हो रही है। इससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो धंधेबाजों ने करीब दो दर्जन से अधिक बाउंसर तैनात कर दिए, ताकि कोई विरोध न कर सके।ग्रामीणों के अनुसार लताकी स्थित एक माइंस की लीज वर्ष 2020 में ही समाप्त हो चुकी है, इसके बावजूद वहां दिन-रात अवैध खनन जारी है। इस पूरे गोरखधंधे में पंचायत के कुछ प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता की भी चर्चा है।
मामले को लेकर जिला खान निरीक्षक ने जमुआ थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है, लेकिन कार्रवाई के बावजूद खनन पर रोक नहीं लग सकी है। रात के अंधेरे में पत्थरों की खुदाई और ढुलाई का सिलसिला जारी है।दस्तावेजों के अनुसार जमुआ के छह गांवों में कुल आठ पत्थर माइंस संचालित हैं, जिनमें से पांच अवैध बताए जा रहे हैं। यहां नियमों को ताक पर रखकर पत्थरों की खुदाई की जा रही है। वहीं वैध खदानों में भी ब्लास्टिंग के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। ब्लास्टिंग के समय मैट का उपयोग नहीं किए जाने से पत्थरों के टुकड़े उड़कर घरों और खेतों तक पहुंच रहे हैं। इससे ग्रामीणों में भय और आक्रोश व्याप्त है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अविलंब कार्रवाई कर अवैध खनन पर रोक लगाने, सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराने तथा नदी और पर्यावरण को हो रहे नुकसान की जांच कराने की मांग की है।अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक ठोस कदम उठाता है और अवैध खनन के इस खेल पर लगाम लगती है या नहीं।