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सम्मेद शिखरजी में 1021 श्रद्धालुओं ने की पावन वंदना, ऐतिहासिक यात्रा बनी श्रद्धा का प्रतीक।

पीरटांड,शिखर दर्पण संवाददाता।

शाश्वत सिद्धक्षेत्र श्री सम्मेद शिखरजी की तलहटी सोमवार को भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखी। विद्या समय संस्कार सेवा फाउंडेशन द्वारा आयोजित विशेष तीर्थयात्रा में शामिल 1039 श्रद्धालुओं में से 1021 यात्रियों ने पूर्ण श्रद्धा और अनुशासन के साथ पर्वतराज की निर्विघ्न वंदना संपन्न की।इस यात्रा की विशेष उपलब्धि यह रही कि 950 से अधिक श्रद्धालुओं ने जीवन में पहली बार शिखरजी की पावन भूमि का स्पर्श कर वंदना का पुण्य लाभ प्राप्त किया। यह आयोजन आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज की उस प्रेरणा को साकार करता है, जिसमें उन्होंने उन श्रावकों-श्राविकाओं को शिखरजी ले जाने का संदेश दिया था जिन्होंने अब तक इस महान सिद्धक्षेत्र की वंदना नहीं की थी। यात्रा में लगभग 100 व्रती श्रावकों की सहभागिता भी उल्लेखनीय रही।

जैन परंपरा के अनुसार, सम्मेद शिखरजी वह पावन भूमि है जहाँ वर्तमान काल के 24 में से 20 तीर्थंकरों तथा असंख्य मुनिराजों ने मोक्ष प्राप्त किया। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहाँ की भावपूर्ण वंदना जन्म-मरण के दुखों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।फाउंडेशन ने इस सफल आयोजन के लिए संघपति ‘गुप्त दानदाता’ श्रावक श्रेष्ठी परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से सैकड़ों परिवारों का शिखरजी वंदना का सपना साकार हो सका। साथ ही कार्यकर्ताओं की सजगता, समर्पण और अनुशासित व्यवस्थाओं के कारण पूरी यात्रा शांतिपूर्ण और निर्विघ्न रूप से संपन्न हुई।वंदना के बाद श्रद्धालुओं के चेहरों पर झलकता संतोष और भक्ति भाव इस आध्यात्मिक यात्रा की सफलता का सजीव प्रमाण बनकर उभरा। वर्ष 2026 की यह शिखरजी यात्रा श्रद्धा, सेवा और सामूहिक धर्मभावना का प्रेरणादायी उदाहरण बन गई है।

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