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UGC के भेदभाव निषेध विनियमों पर सवर्ण एकता मंच ने जताई चिंता, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता। 

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा प्रस्तावित/लागू किए गए भेदभाव निषेध विनियमों को लेकर सवर्ण एकता मंच, गिरिडीह (झारखंड) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। इस संबंध में मंच की ओर से राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन गिरिडीह उपायुक्त को सौंपा गया, जिसमें विनियमों के संभावित दुष्प्रभावों पर पुनर्विचार और संतुलित सुरक्षा प्रावधान जोड़ने की मांग की गई है।ज्ञापन में कहा गया है कि भारतीय संविधान समानता, गरिमा और न्याय की रक्षा करता है तथा भेदभाव के विरुद्ध कठोर कदम आवश्यक हैं, लेकिन ऐसे कानून नहीं बनने चाहिए जो स्वयं किसी नए प्रकार के संस्थागत अन्याय, असंतुलन या भय का वातावरण उत्पन्न करें। मंच ने सवाल उठाया है कि वर्तमान स्वरूप में ये विनियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 की भावना के अनुरूप हैं या नहीं।सवर्ण एकता मंच का आरोप है कि विनियमों में “भेदभाव” की परिभाषा अत्यंत व्यापक और अस्पष्ट है। इससे परीक्षा में कम अंक मिलना, शोध प्रस्ताव की अस्वीकृति या चयन न होने जैसे अकादमिक निर्णयों को भी जातिगत भेदभाव के रूप में प्रस्तुत किए जाने की संभावना बनती है। 

इससे शिक्षकों की अकादमिक स्वतंत्रता, निष्पक्ष मूल्यांकन प्रणाली और मेरिट आधारित प्रक्रियाओं पर दबाव पड़ सकता है।मंच ने यह भी आशंका जताई कि शिकायत निवारण प्रक्रिया में पूर्व दोषारोपण की प्रवृत्ति विकसित हो सकती है, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। इससे शिक्षकों और छात्रों पर मानसिक, सामाजिक और व्यावसायिक नकारात्मक प्रभाव पड़ने की बात कही गई।ज्ञापन में सरकार से मांग की गई है कि भेदभाव की स्पष्ट, वस्तुनिष्ठ और साक्ष्य-आधारित परिभाषा तय की जाए, प्रत्येक शिकायत पर औपचारिक कार्रवाई से पूर्व निष्पक्ष प्रारंभिक जांच अनिवार्य की जाए, शिकायत निवारण समितियों में सभी वर्गों का संतुलित प्रतिनिधित्व और स्वतंत्र कानूनी विशेषज्ञ को शामिल किया जाए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर दंडात्मक प्रावधान जोड़े जाने और मेरिट आधारित अकादमिक निर्णयों को स्वतः भेदभाव की श्रेणी में न रखने की भी मांग की गई है।सवर्ण एकता मंच ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार शिक्षा क्षेत्र में ऐसे कानूनों को बढ़ावा देगी, जो भेदभाव समाप्त करने के साथ-साथ सभी वर्गों के लिए न्याय, सुरक्षा और विश्वास का वातावरण सुनिश्चित करें।


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