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छूछुंदरी नदी बचाव अभियान तेज करने का ऐलान, नदी को नाला बनने से बचाने की पहल।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।

“जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा करना हमारा पहला कर्तव्य है। जल स्रोतों को नष्ट होने से बचाना होगा।” उक्त बातें सामाजिक कार्यकर्ता राजेश सिन्हा ने कहीं। उन्होंने कहा कि छूछुंदरी नदी, जो कभी क्षेत्र की जीवनरेखा थी, आज नाला में तब्दील हो चुकी है। इसे फिर से नदी के रूप में पुनर्जीवित करने के लिए छूछुंदरी नदी बचाव अभियान को तेज किया जाएगा।राजेश सिन्हा ने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए लोकल नेता, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, आम और खास लोगों से व्यापक संवाद किया जाएगा। साथ ही इस विषय को लेकर प्रशासन को लिखित आवेदन भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह उसरी नदी बचाव अभियान के तहत लगातार आवाज उठाई गई, कार्यक्रम आयोजित किए गए, उसी तर्ज पर अब छूछुंदरी नदी को बचाने की मुहिम चलाई जाएगी।उन्होंने याद दिलाया कि उसरी बचाव अभियान के दौरान उसरी महोत्सव, पदयात्रा, धरना और जागरूकता कार्यक्रम लगातार चले, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। 

आज उसी अभियान का नतीजा है कि उसरी नदी के किनारे वन विभाग द्वारा इस वर्ष लगभग चार हजार पेड़ लगाए जाने की योजना है। पूर्वी वन प्रमंडल के डीएफओ मनीष तिवारी को एक वर्ष पूर्व इस संबंध में लिखित आवेदन दिया गया था। इसके अलावा छिलका डेम के लिए सीसीएल गिरिडीह से लगभग चार करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हुई है, जिस पर 2025 में कार्य होने की संभावना है। सिहोडीह–शास्त्रीनगर पुल निर्माण, कॉरिडोर निर्माण सहित कई विकास कार्य भी प्रस्तावित हैं, जिनके लिए नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के प्रयासों की सराहना की गई।राजेश सिन्हा ने कहा कि छूछुंदरी नदी का अस्तित्व अब समाप्ति के कगार पर है। सैकड़ों वर्ष पुरानी यह नदी आज नाला बन चुकी है, फिर भी हजारों परिवार इसी बहते नाले पर निर्भर हैं। महिलाएं, बच्चे और पुरुष अपनी दैनिक जरूरतों के लिए यहीं आते हैं। प्रशासनिक जागरूकता के अभाव में यह नदी नाले में परिणत हो गई है।

यह नाला खारियोडीह डेम के आसपास से निकलकर पश्चिम दिशा में बक्सीडीह बस्ती, कमरसाली, पपरवाटांड़ पुल के आगे बनियाडीह होते हुए सीसीएल क्षेत्र तक बहता है। इसे पुनः नदी के स्वरूप में लाने की सख्त जरूरत है। इसके लिए लोकल जनप्रतिनिधियों की अगुवाई में एक मजबूत टीम बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें स्थानीय प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और जागरूक नागरिक शामिल होंगे।इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए समाजसेवी मंटू सिन्हा, नागेश्वर दास, विकास सिन्हा, शिवनाथ साव (वर्तमान मुखिया, महेशलुंडी), पूर्व मुखिया अर्जुन रवानी, लच्छू साव, सन्नी सिन्हा सहित दर्जनों लोगों से बातचीत की जाएगी। योजना के तहत करीब 50 बैठकों का आयोजन कर, हर मोहल्ले में एक बैठक कर लोगों को जागरूक किया जाएगा।इस मुहिम में माले की टीम के नौशाद आलम, कन्हैया सिंह, मजहर आलम, चुन्नू, रेहान सहित अन्य कार्यकर्ता भी जोर-शोर से जुटेंगे। राजेश सिन्हा ने कहा कि “आस-पास के क्षेत्र को बेहतर बनाना हम सबका फर्ज है और छूछुंदरी नदी को बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।”

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