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बालमुकुंद स्पंज आयरन फैक्ट्री में मजदूरों की छंटनी का विरोध, प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता। 

बालमुकुंद स्पंज आयरन फैक्ट्री में मजदूरों को बिना कारण और बिना नोटिस हटाए जाने के विरोध में भाकपा (माले) की मजदूर इकाई असंगठित मजदूर मोर्चा के बैनर तले सोमवार को मजदूरों ने फैक्ट्री गेट के पास सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया। यह कार्यक्रम पूर्व निर्धारित था, जिसकी सूचना जिला प्रशासन एवं श्रम अधीक्षक को पहले ही दी गई थी।मजदूर नेताओं ने आरोप लगाया कि फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा बार-बार मजदूरों को नियम-कानून ताक पर रखकर हटाया जा रहा है। माले नेता राजेश सिन्हा ने कहा कि “फैक्ट्री प्रबंधन मजदूरों के साथ ज्यादती करना बंद करे। हटाए गए मजदूरों के मुद्दे पर एक सप्ताह बाद वार्ता तय हुई है और अब प्रबंधन सीधे मजदूरों से बातचीत शुरू करने को मजबूर हुआ है।”प्रदर्शन के दौरान फैक्ट्री प्रबंधन ने जिला प्रशासन को यह रिपोर्ट देने का प्रयास किया कि किसी मजदूर को नहीं हटाया गया है, लेकिन जब प्रशासन के समक्ष ठेकेदार और मजदूरों से सीधी बातचीत कराई गई, तब सच्चाई सामने आ गई। इसके बाद प्रबंधन की रिपोर्ट को झूठा बताया गया।माले नेता कन्हाई पांडेय ने कहा कि बालमुकुंद फैक्ट्री प्रबंधन बार-बार वही गलतियां दोहरा रहा है, जिसमें सुधार की सख्त जरूरत है। 

उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्ट्रियों में मजदूरों से 12 घंटे काम लिया जा रहा है, सरकारी सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं और क्षेत्र में प्रदूषण चरम पर है।गिरिडीह एवं गांडेय विधानसभा प्रभारी पूरन महतो ने कहा कि मजदूरों और आम जनता को एकजुट कर जल्द ही बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूंजीपति मुनाफा कमाते हैं, लेकिन संकट के समय गिरिडीह की जनता के साथ खड़े नहीं होते।माले नेताओं ने बताया कि हाल के दिनों में फैक्ट्री से जुड़ी दो मौतों के मामलों में संगठन के आंदोलन के बाद ही मुआवजा मिला था।चेतावनी दी गई कि यदि आगे भी मजदूरों को अवैध रूप से हटाया गया, तो जिला प्रशासन, श्रम अधीक्षक एवं संबंधित अधिकारियों से बात कर लोकतांत्रिक आंदोलन तेज किया जाएगा।प्रदर्शन में यह भी आरोप लगाया गया कि वीरेंद्र चौधरी, मनोज चौधरी, मेहताब अंसारी और मिन्हाज अंसारी को बिना नोटिस और बिना कारण बताए काम से हटा दिया गया, जिससे उनके परिवारों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।इस सांकेतिक आंदोलन का नेतृत्व प्रखंड सचिव मसूदन कोल, किशोर राय, भीम कोल, पवन यादव, लखन कोल, धनेश्वर कोल, धूमा टुड्डू, चंदन टुडू, सोमी देवी, सुनील ठाकुर, दिलचंद कोल, मोहन कोल, हीरालाल पंडित, हरि पंडित, बुधन तुरी, गणेश तुरी, संजय तुरी, नारायण तुरी, राजू तुरी, प्रीतम तुरी, भीम दास सहित बड़ी संख्या में महिला-पुरुष मजदूरों ने भाग लिया। महिलाओं में मांगरी देवी, जितनी देवी सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहीं।


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