ढेर हो गया नक्सलियों का आका, एक करोड़ का इनामी नक्सली अनल दा//सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों–नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़, अनल दा समेत 10–12 नक्सली ढेर।
SHIKHAR DARPANThursday, January 22, 2026
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गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा के घने जंगलों में गुरुवार तड़के सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। इस मुठभेड़ में भाकपा (माओवादी) के केंद्रीय कमिटी सदस्य (सीसीएम) और एक करोड़ रुपये के इनामी कुख्यात नक्सली अनल दा उर्फ पतिराम मांझी ढेर हो गया। इस अभियान में अनल दा समेत कुल 10 से 12 नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि सुरक्षा सूत्रों द्वारा की जा रही है।मुठभेड़ छोटानागरा थाना क्षेत्र के कुंभडीह गांव के पास उस समय शुरू हुई, जब सुरक्षाबल सर्च ऑपरेशन पर निकले थे। जंगल में पहले से घात लगाए बैठे नक्सलियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभालते हुए पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। इसके बाद दोनों ओर से कई घंटों तक लगातार गोलीबारी होती रही।बताया जा रहा है कि अनल दा के दस्ते की सीधी मुठभेड़ कोबरा 209 बटालियन से हुई।
मुठभेड़ के दौरान पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया। आसपास के ग्रामीण गोलीबारी की आवाजें सुनकर सहम गए। घटना के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर अतिरिक्त बलों को मौके पर भेजा गया है। फिलहाल सारंडा जंगल में बड़े पैमाने पर सघन सर्च ऑपरेशन जारी है।मारे गए नक्सली अनल दा का असली नाम पतिराम मांझी उर्फ पतिराम मरांडी उर्फ तुफान उर्फ रमेश बताया जा रहा है। वह पिता टोटो मरांडी उर्फ तारू मांझी का पुत्र था और गिरिडीह जिले के पीरटांड थाना क्षेत्र अंतर्गत झारहा गांव का रहने वाला था। अनल दा लंबे समय से सारंडा और गिरिडीह के जंगलों में सक्रिय था और झारखंड के सबसे खूंखार नक्सलियों में गिना जाता था।
उसके खिलाफ हत्या, विस्फोट, हथियारों की लूट और पुलिस पर हमले समेत कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। माओवादी संगठन में केंद्रीय कमिटी सदस्य होने के कारण संगठन की रणनीति, हथियारों की आपूर्ति और बड़े ऑपरेशनों में उसकी अहम भूमिका मानी जाती थी।मुठभेड़ के बाद घटनास्थल से एके-47, इंसास राइफल, एसएलआर समेत भारी मात्रा में हथियार, गोलियां और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि अनल दा के मारे जाने से नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है और सारंडा व आसपास के इलाकों में माओवादी गतिविधियों पर इसका गहरा असर पड़ेगा।