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कबरीबाद कोयला क्षेत्र के पुनर्पयोग एवं क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास को लेकर उपायुक्त की अध्यक्षता में बैठक, स्थानीय जरूरतों एवं वैकल्पिक आजीविका पर जोर।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता। 

कबरीबाद कोयला क्षेत्र के पुनर्पयोग की संभावनाओं, स्थानीय समुदाय की आवश्यकताओं तथा क्षेत्र के दीर्घकालिक सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय विकास को लेकर आज नगर भवन गिरिडीह में हितधारकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपायुक्त रामनिवास यादव की उपस्थिति में क्षेत्र के पुनर्पयोग की संभावनाओं पर विभिन्न हितधारकों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक का आयोजन जिला प्रशासन, गिरिडीह द्वारा जस्ट ट्रांजिशन रिसर्च सेंटर (JTRC), आईआईटी कानपुर के सहयोग से किया गया। बैठक में खनन बंदी सलाहकार समिति के सदस्यों, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के अधिकारियों, प्रभावित पंचायतों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों सहित कुल 43 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। बैठक में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों, समुदाय की आवश्यकताओं तथा खनन गतिविधियों के बाद क्षेत्र के पुनर्पयोग से संबंधित संभावनाओं पर सुझाव एवं विचार साझा किए गए।बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त रामनिवास यादव ने कहा कि कबरीबाद कोयला क्षेत्र के भविष्य को लेकर किसी भी योजना में स्थानीय समुदाय की आवश्यकताओं, आजीविका के अवसरों तथा दीर्घकालिक प्रभावों को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है। 

उन्होंने कहा कि आईआईटी कानपुर क्षेत्र के भविष्य के आर्थिक विकास की रूपरेखा तैयार करने तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संभावनाओं को समझने में महत्वपूर्ण सहयोग कर सकता है। उन्होंने सभी संबंधित हितधारकों से स्थानीय परिस्थितियों एवं आवश्यकताओं के अनुरूप व्यवहारिक सुझाव साझा करने की अपील की। अपने स्वागत संबोधन में आईआईटी कानपुर के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष तथा जेटीआरसी के संस्थापक प्रो. प्रदीप स्वर्णकार ने बैठक के उद्देश्य एवं जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों के साथ-साथ क्षेत्र के दीर्घकालिक सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय भविष्य की योजना तैयार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन तथा सीसीएल के साथ समन्वय स्थापित कर समुदाय की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने और उनके अनुरूप संभावनाओं की पहचान करने में यह प्रक्रिया सहायक होगी। सीसीएल, गिरिडीह क्षेत्र के महाप्रबंधक (खनन) कनैया शंकर गोपाल ने कबरीबाद खदान के इतिहास, क्षेत्र में सीसीएल की भूमिका तथा खदान की भावी योजनाओं के संबंध में जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों एवं स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भविष्य के लिए उपयुक्त विकल्पों की पहचान महत्वपूर्ण है। वहीं सीसीएल मुख्यालय के महाप्रबंधक (खनन) आनंद प्रकाश ने भी चर्चा में भाग लेते हुए क्षेत्र के पुनर्पयोग से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।

बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने जमीनी हकीकत, स्थानीय आकांक्षाओं और समुदाय की आवश्यकताओं पर विस्तार से चर्चा की। विशेष रूप से महिलाओं एवं युवाओं के लिए वैकल्पिक आजीविका के अवसरों पर विचार करते हुए मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, डेयरी, मुर्गी पालन, जैविक खेती तथा वर्मी कम्पोस्ट निर्माण जैसे विकल्पों पर सुझाव सामने आए। इसके साथ ही पारिस्थितिक पुनर्स्थापन, पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा तथा तकनीकी कौशल विकास जैसे व्यापक विकल्पों पर भी चर्चा की गई। बैठक में प्राप्त सुझावों को कबरीबाद क्षेत्र के लिए साक्ष्य-आधारित पुनर्पयोग योजना तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण इनपुट के रूप में लिया जाएगा। इन सुझावों एवं विचारों को आगे खान बंदी सलाहकार समिति के समक्ष रखा जाएगा, ताकि स्थानीय परिस्थितियों, समुदाय की आवश्यकताओं एवं दीर्घकालिक विकास की संभावनाओं के अनुरूप आगे की कार्ययोजना पर विचार किया जा सके। बैठक में सहायक समाहर्ता यश कुमार सहित संबंधित पदाधिकारी, सीसीएल के अधिकारी, आईआईटी कानपुर/JTRC के प्रतिनिधि, प्रभावित पंचायतों के निर्वाचित जनप्रतिनिधि एवं अन्य हितधारक उपस्थित थे।


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