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तीन दशक का राजनीतिक सफर, दो बार विधायक और फिर कैबिनेट मंत्री बने सुदिव्य कुमार सोनू।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवददाता।

झारखंड की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता और झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का आकस्मिक निधन पूरे राज्य के लिए अपूरणीय क्षति है। गिरिडीह की धरती से राजनीति शुरू कर संघर्ष के लंबे दौर से गुजरते हुए उन्होंने विधायक से लेकर राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री तक का सफर तय किया। करीब तीन दशक तक झामुमो से जुड़े रहने के बाद वह पार्टी के भरोसेमंद नेताओं में शामिल हुए।
*गिरिडीह में हुआ जन्म*
सुदिव्य कुमार सोनू का जन्म 26 जुलाई 1970 को गिरिडीह में हुआ था। उनके पिता का नाम शंभूनाथ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद डी.एस. कॉलेज, पूर्णिया, बिहार से वर्ष 1986 में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। चुनावी हलफनामे और उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में उनकी शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास दर्ज है।
*झामुमो से जुड़कर शुरू किया राजनीतिक सफर*
सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक जीवन झारखंड आंदोलन और झामुमो की विचारधारा से जुड़ा रहा। लंबे समय तक संगठन के लिए काम करने के बाद वह धीरे-धीरे पार्टी में महत्वपूर्ण भूमिका में पहुंचे। करीब तीन दशक तक झामुमो के साथ जुड़े रहना उनके राजनीतिक सफर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में माना जाता है। पार्टी के भीतर वह संगठन के भरोसेमंद और सक्रिय नेताओं में गिने जाते थे।

*2019 में पहली बार विधानसभा पहुंचे*
लंबे राजनीतिक संघर्ष के बाद वर्ष 2019 में सुदिव्य कुमार सोनू ने गिरिडीह विधानसभा सीट से झामुमो प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने गिरिडीह की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई और पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल होते चले गए। रिकॉर्ड के अनुसार उनका पहला विधानसभा कार्यकाल दिसंबर 2019 से शुरू हुआ था।
*2024 में दोबारा विधायक बने*
वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने गिरिडीह सीट से एक बार फिर जीत दर्ज की और लगातार दूसरी बार विधायक बने। इसके बाद हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बनी सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। कई महत्वपूर्ण विभागों की संभाली जिम्मेदारी
मंत्री बनने के बाद सुदिव्य कुमार सोनू के पास सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी रही। इनमें उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, शहरी विकास एवं आवास, पर्यटन, कला एवं संस्कृति, खेलकूद तथा युवा कार्य जैसे विभाग शामिल थे। अलग-अलग समय में इन विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों और नीतिगत मामलों में उन्होंने सरकार का प्रतिनिधित्व किया।

*छात्रों के मुद्दों पर भी रहे सक्रिय*
मंत्री के रूप में सुदिव्य कुमार सोनू की एक महत्वपूर्ण भूमिका छात्रों से जुड़े मामलों में भी रही। हाल के वर्षों में छात्र संगठनों और सरकार के बीच बातचीत में उन्होंने प्रतिनिधि की भूमिका निभाई। विशेषकर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभालने के कारण शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता लगातार बनी रही।
*गिरिडीह से रहा गहरा जुड़ाव*
सुदिव्य कुमार सोनू के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी विशेषता उनका गिरिडीह से गहरा जुड़ाव रहा। विधायक बनने के बाद उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं को विधानसभा और सरकार के स्तर पर उठाया। स्थानीय राजनीति में उनका प्रभाव लगातार बढ़ता गया और वह गिरिडीह की राजनीति में झामुमो के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी सहयोगी सुदिव्य कुमार सोनू को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी और भरोसेमंद राजनीतिक सहयोगियों में माना जाता था। सरकार और संगठन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में उनकी सक्रिय भूमिका रही। उनके निधन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी गहरा दुख व्यक्त किया और उन्हें बड़े भाई जैसा करीबी बताते हुए श्रद्धांजलि दी।

*अचानक थम गया जीवन का सफर*
6 सितंबर 2026 को झारखंड की राजनीति को उस समय बड़ा झटका लगा, जब सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक निधन हो गया। शनिवार देर रात गिरिडीह स्थित उनके आवास पर तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। प्रारंभिक रिपोर्टों में कार्डियक अरेस्ट/हार्ट अटैक को निधन की वजह बताया गया है। उनके निधन की खबर फैलते ही गिरिडीह समेत पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में समर्थक, पार्टी कार्यकर्ता और आम लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े।
*राजनीतिक सफर का अंत, यादें हमेशा रहेंगी*
एक सामान्य राजनीतिक कार्यकर्ता से झामुमो के वरिष्ठ नेता, दो बार विधायक और फिर राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री तक का सुदिव्य कुमार सोनू का सफर संघर्ष, संगठन और सक्रिय राजनीति से जुड़ा रहा। उनका अचानक जाना झामुमो के साथ-साथ गिरिडीह और पूरे झारखंड की राजनीति के लिए एक बड़ा नुकसान माना जा रहा है। सुदिव्य कुमार सोनू का राजनीतिक सफर भले ही अचानक थम गया, लेकिन गिरिडीह की राजनीति और झारखंड की सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की याद लंबे समय तक बनी रहेगी।

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