आजादी के 75 साल बाद भी पीरटांड़ के ग्रामीण इलाकों में विकास की राह कठिन//नदी पर पुल नहीं होने से स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को परेशानी, ग्रामीणों ने खुद बनाया लकड़ी का पुल।
SHIKHAR DARPANThursday, September 10, 2026
0
पीरटांड़,शिखर दर्पण संवाददाता।
आजादी के 75 साल बाद भी पीरटांड़ प्रखंड के सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव विकास के दावों पर सवाल खड़ा कर रहा है। प्रखंड की सिमरकोड़ी पंचायत अंतर्गत दर्दमारा टोला जमुनियाटांड़ में ग्रामीणों को आज भी आवागमन के लिए गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार दर्दमारा और बोरापहाड़ी की सीमा के बीच एक नदी पड़ती है। इस नदी पर आवागमन के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ स्कूली बच्चों को भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सामान्य दिनों में किसी तरह बच्चे नदी पार कर स्कूल पहुंच जाते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होने पर बच्चों का स्कूल जाना पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी में पानी बढ़ने के बाद आवागमन जोखिम भरा हो जाता है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ ग्रामीणों को भी पंचायत मुख्यालय और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचने में परेशानी होती है।
तिलैया, लुकुर्वा, जमुनियाटांड़ समेत आसपास के कई गांवों के लोगों को भी इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत भवन व प्रखंड मुख्यालय जाने के लिए भी उन्हें काफी दिक्कतों से गुजरना पड़ता है। बरसात के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती है। ग्रामीण लंबे समय से नदी पर पुलिया अथवा पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और आम लोगों का आवागमन सुगम हो सके।इधर इस कठिनाई को देखते हुए ग्रामीणों ने खुद से ही लकड़ी का पुलिया बनाकर तैयार कर दिया है। अब लकड़ी के पुल के सहारे लोग आवागमन करते हैं। भारी बारिश के बीच ग्रामीणों के मन में भय बना रहता है कि कहीं पुल टूट कर बा ना जाए और किसी प्रकार की अप्रिय घटना ना जाए। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण कर नदी पर जल्द से जल्द पुल या पुलिया का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, पुल और सुरक्षित आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराए बिना सुदूर गांवों में विकास की तस्वीर पूरी नहीं हो सकती।