सीसीएल गिरिडीह क्षेत्र की बड़ी आबादी पर खतरा, खानापूर्ति कर रहा प्रबंधन और प्रशासन : राजेश सिन्हा।
SHIKHAR DARPANTuesday, August 25, 2026
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गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।
सीसीएल गिरिडीह क्षेत्र में खनन गतिविधियों से प्रभावित बड़ी आबादी की सुरक्षा को लेकर भाकपा माले नेता राजेश सिन्हा ने सीसीएल प्रबंधन और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और पुनर्वास के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है, जबकि जमीन धंसने, जलभराव और मकानों में दरार जैसी समस्याओं का खतरा बना हुआ है। राजेश सिन्हा ने केंद्र सरकार की 2025 की नई खदान बंदी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि अब खदान बंद करना केवल खदान को बंद कर छोड़ देना नहीं है। खनन के दौरान ही जमीन और पर्यावरण के पुनर्स्थापन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। पुराने भूमिगत खनन वाले क्षेत्रों में जमीन धंसने, पानी भरने तथा मकानों और अन्य संरचनाओं को होने वाले नुकसान की जांच भी जरूरी होगी। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में खदान से प्रभावित गांव, सड़क, स्कूल और बस्तियों को भी प्रभाव क्षेत्र के रूप में शामिल कर योजना तैयार करने की बात कही गई है। ग्राम सभा और पंचायतों की भागीदारी को भी महत्व दिया गया है।
माले नेता के अनुसार, खदान बंदी के लिए रखी गई राशि का एक हिस्सा प्रभावित समुदाय के विकास और रोजगार से जुड़े कार्यों पर खर्च किया जाना है। उन्होंने बताया कि एस्क्रो राशि के 25 प्रतिशत हिस्से को समुदाय के विकास और रोजगार तथा अंतिम खदान बंदी लागत के 10 प्रतिशत को कौशल विकास और नए रोजगार के लिए उपयोग करने का प्रावधान है।राजेश सिन्हा ने कहा कि बंद खदानों की जमीन का उपयोग खेती, तालाब, मछली पालन, इको-पार्क और सौर ऊर्जा संयंत्र जैसे सामुदायिक कार्यों के लिए किया जा सकता है। उन्होंने खनन प्रभावित पंचायतों के लोगों से अपील की कि वे सीसीएल प्रबंधन से खदान बंदी और पुनर्वास के लिए निर्धारित राशि के खर्च का हिसाब मांगें तथा यह भी सुनिश्चित करें कि योजनाओं में ग्राम सभा की भागीदारी हो।उन्होंने कहा कि गिरिडीह के खनन प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। प्रबंधन और प्रशासन को कागजी कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय जमीन पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।