Type Here to Get Search Results !

संयम और सात्विकता से ही मिलता है वास्तविक सुख और स्वास्थ्य : मुनि प्रमाण सागर।

पीरटांड़,शिखर दर्पण संवाददाता।

श्री सम्मेद शिखरजी मधुबन स्थित गुणायतन में आयोजित प्रातः कालीन धर्मसभा में राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को संयम और सात्विक जीवन अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में संयम और सात्विकता अपनाकर ही वास्तविक सुख और स्वास्थ्य प्राप्त किया जा सकता है। मुनिश्री ने कहा कि सात्विक भोजन शरीर को स्वस्थ रखने के साथ साधना को भी सफल बनाता है। वास्तविक स्वाद मिर्च-मसालों और कृत्रिम फ्लेवर में नहीं, बल्कि प्राकृतिक सात्विकता में है। सादा और संतुलित भोजन शरीर को हल्का, मन को शांत तथा साधना के लिए अनुकूल बनाता है। वहीं अत्यधिक मसालेदार, तला-भुना, जंक फूड और फास्ट फूड स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से तामसिक और राजसिक भोजन से बचने तथा सात्विक आहार को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

प्रवचन के दौरान मुनिश्री ने एक बालक से जुड़े प्रसंग के माध्यम से कहा कि “खाना खाया जाता है, भोजन किया जाता है और आहार लिया जाता है।” उन्होंने समझाया कि खाने में स्वाद और आसक्ति हो सकती है, भोजन में सात्विकता व संयम होता है, जबकि आहार विरक्ति एवं निष्पृहता का प्रतीक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा, “खाना खाना बंद करके भोजन करना शुरू कर दो।” गुणायतन प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के तहत मंगलवार को 1024 अर्घ्य समर्पित किए गए। विधान खुरई से आए श्रीमंत अशोक कुमार सिंघई परिवार एवं परिजनों द्वारा कराया गया, जिसका निर्देशन अशोक भैयाजी ने किया। मुनिश्री ने श्रद्धालुओं से कहा कि श्री सम्मेद शिखरजी से लौटने के बाद उनके जीवन में आया सकारात्मक बदलाव ही इस धार्मिक अनुष्ठान की सार्थकता का प्रमाण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सात्विक, सरल और संतुलित आहार से तन, मन और चेतना स्वस्थ रहते हैं तथा जीवन कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ता है।

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.