नकारात्मकता नहीं, सकारात्मकता से बचेंगे तीर्थ : मुनि प्रमाण सागर महाराज"।
SHIKHAR DARPANTuesday, August 18, 2026
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पीरटांड़,शिखर दर्पण संवाददाता।
गिरीडीह श्रीसम्मेद शिखरजी की पवित्रता और मर्यादा को लेकर युवाओं में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए राष्ट्रसंत मुनि प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि तीर्थ क्षेत्र में आने वाले युवाओं को रोकना नहीं, बल्कि प्रेम,सद्भाव और सकारात्मक प्रेरणा के माध्यम से पर्यटक से तीर्थयात्री बनाना हमारा लक्ष्य होना चाहिए।उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में यदि कोई युवा सम्मेद शिखरजी को पर्यटन स्थल समझकर आता है,तो उसे डांटने या तिरस्कार करने के बजाय तीर्थ की महिमा और मर्यादा समझाना समाज की जिम्मेदारी है। युवाओं को यह बताया जाना चाहिए कि सम्मेद शिखरजी कोई साधारण स्थान नहीं, बल्कि 20 तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि है। मुनि श्री ने कहा कि “हमारे पास कुछ गया नहीं है, जो है उसे संभालना है।” आजआवश्यकता इस बात की है कि समाज में नकारात्मकता फैलाने के बजाय सकारात्मक वातावरण तैयार किया जाए। गिरनार या सम्मेद शिखरजी को लेकर केवल यह कहना कि सब कुछ चला गया या अब कुछ नहीं बचा, समस्या का समाधान नहीं है। हमें कहना चाहिए—“न गिरनार गया है, न सम्मेद शिखरजी गया है, खड़े होकर प्रयास तो करो, सहयोग तो करो।”उन्होंने कहा कि ताली एक हाथ से नहीं बजती। तीर्थ की रक्षा और उसकी गरिमा बनाए रखने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।
समाज को निराशा और नकारात्मक चर्चाओं से बाहर निकलकर रचनात्मक कार्यों की ओर बढ़ना चाहिए।मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि सम्मेद शिखरजी की वर्तमान परिस्थितियों को लेकर संबंधित संस्थाओं और प्रमुख लोगों से चर्चा के बाद एक कार्ययोजना तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि यदि इस कार्ययोजना को धैर्य, संयम और सकारात्मक सोच के साथ प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो छह महीने में सम्मेद शिखरजी की रंगत बदली हुई दिखाई दे सकती है।उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से इस विषय पर सार्वजनिक रूप से बोलने के बजाय पहले स्थानीय संस्थाओं और संबंधित लोगों से चर्चा करना चाहते थे, ताकि समस्या का समाधान जमीनी स्तर पर और मजबूत तरीके से हो। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि जैन श्वेतांबर सोसायटी के अध्यक्ष कमल सिंह जी रामपुरिया, भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष जंबू प्रसाद जैन सहित पूरी टीम इस दिशा में सक्रिय होकर कार्य कर रही है।मुनि श्री ने कहा कि सम्मेद शिखरजी आने वाले प्रत्येक युवा को यह प्रेरणा मिलनी चाहिए कि वह यहां से केवल घूमने की यादें लेकर नहीं, बल्कि जीवन बदलने का संकल्प लेकर लौटे। ट्रैकिंग कुछ समय का आनंद दे सकती है, लेकिन तीर्थयात्रा पूरे जीवन को संवार सकती है। युवाओं को व्यसनमुक्ति, अहिंसा, शाकाहार और सदाचार की ओर प्रेरित करना समाज की बड़ी उपलब्धि होगी।
उन्होंने कहा कि तीर्थ की मर्यादा समझाने का तरीका प्रेमपूर्ण होना चाहिए। किसी अज्ञानी व्यक्ति को डांटने या अपमानित करने से वह दूर होगा, जबकि मुस्कुराकर भगवान के चरणों में चावल का पुंज या अर्घ्य चढ़ाने के लिए प्रेरित करने से उसके भीतर श्रद्धा का भाव जाग सकता है। “हमें रोक से रूपांतरण की ओर बढ़ना है, क्योंकि प्रेरणा ही परिवर्तन का मूल आधार है।”मुनि श्री ने सोशल मीडिया पर भी विशेष सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिना वास्तविकता जाने प्रतिक्रियात्मक पोस्ट और वीडियो डालने से समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि उसका दुष्प्रचार और बढ़ सकता है। यदि सम्मेद शिखरजी के सच्चे हितैषी हैं तो इस विषय को नकारात्मक सोशल मीडिया बहस का माध्यम बनाने के बजाय सकारात्मक संदेश और जागरूकता का माध्यम बनाएं।उन्होंने कहा कि सम्मेद शिखरजी सबका तीर्थ है। यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का स्वागत होना चाहिए, लेकिन उसे यह समझाना भी आवश्यक है कि वह पर्यटन के लिए नहीं, तीर्थयात्रा के भाव से आए। उन्होंने समाजजनों से धैर्य, संयम और सकारात्मकता के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से आने वाले समय में सम्मेद शिखरजी की गरिमा और पवित्रता को और मजबूत किया जा सकता है। मुनि श्री के मार्गदर्शन में तीर्थ की पवित्रता,युवाओं में जागरूकता और सकारात्मक वातावरण निर्माण की दिशा में समाज स्तर पर प्रयासों को गति दी जा रही है। भगवान श्री पारसनाथ निर्वाण महोत्सव मुकुट सप्तमी पर गुणायतन परिसर मेँ निर्वाण लाडू मध्यान्ह तीन बजे चडाया जाऐगा।