उसरी नदी से औद्योगिक पानी उठाने पर रोक की मांग, ग्रामीणों ने डीसी को सौंपा सामूहिक आवेदन।
SHIKHAR DARPANTuesday, August 11, 2026
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गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।
उसरी नदी बचाओ, उसरी वाटर फॉल बचाओ आंदोलन के तहत ग्रामीणों ने सोमवार को गिरिडीह उपायुक्त को सामूहिक आवेदन सौंपकर चतरो स्थित बालमुकुंद स्पंज आयरन फैक्ट्री द्वारा उसरी नदी से औद्योगिक उपयोग के लिए पानी उठाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों ने नदी से पानी उठाने, पाइपलाइन बिछाने और इंटेकवेल निर्माण को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए सभी आवश्यक अनुमति, एनओसी और सरकारी आदेशों की जांच कराने तथा उन्हें सार्वजनिक करने की मांग की। आवेदन में कहा गया है कि बड़े पैमाने पर जल दोहन से उसरी नदी के प्राकृतिक प्रवाह, प्रसिद्ध उसरी वाटर फॉल, भूजल स्तर, कृषि, पशुपालन और ग्रामीणों की जल उपलब्धता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे विजय विशाल राय के साथ माले नेता राजेश सिन्हा, सुनील शर्मा, चंदर वर्मा, हसनैन अली, टिंकू साव, अरुण साव समेत अन्य ग्रामीणों ने उपायुक्त को आवेदन सौंपा। ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि उपायुक्त फैक्ट्री क्षेत्र का ग्रामीणों के साथ स्थल निरीक्षण करें और जिन इलाकों में पानी की समस्या उत्पन्न हुई है, उन्हें चिन्हित कर पेयजल की व्यवस्था कराई जाए। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री के कारण क्षेत्र में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है या कई स्थानों पर जलस्रोत सूख गए हैं। साथ ही उन्होंने फैक्ट्री के सीएसआर फंड का उपयोग ग्रामीणों के उत्थान में नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए इसकी भी जांच की मांग की। इस पर उपायुक्त ने क्षेत्र भ्रमण कर स्थिति का जायजा लेने की बात कही है।
*सभी विभागों की अनुमति की संयुक्त जांच की मांग:- ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग, डीवीसी, डीवीआरआरसी, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भू-जल बोर्ड, पथ निर्माण विभाग, संबंधित अंचल कार्यालय और जिला प्रशासन से जुड़ी सभी अनुमतियों की संयुक्त जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि नदी से पानी उठाने की अनुमति किस विभाग अथवा प्राधिकरण ने, कब और कितनी मात्रा में दी है। आंदोलनकारियों ने मांग की कि जांच पूरी होने तक नदी से पानी उठाने तथा इंटेकवेल और पाइपलाइन से जुड़े कार्यों पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसके अलावा उसरी नदी के वर्तमान जलप्रवाह और गर्मी व सूखे के दौरान उपलब्ध पानी की मात्रा का वैज्ञानिक एवं तकनीकी सर्वेक्षण कराने की भी मांग की गई है। *2 अगस्त को हुई थी मानव श्रृंखला:- इस मुद्दे को लेकर 2 अगस्त को उसरी वाटर फॉल मोड़ से डांडीडीह तक मानव श्रृंखला का आयोजन किया गया था। इसमें बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, बुजुर्ग, छात्र-छात्राएं, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों से जुड़े लोग शामिल हुए थे। आंदोलनकारियों ने कहा कि यदि नदी से पानी उठाने का काम नहीं रोका गया तो उनका विरोध आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।