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आत्मबोध से भय मिटता है, कर्म का अंत निश्चित और क्षमा से होता है जीवन का उत्थान : मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज।

मधुबन,शिखर दर्पण संवाददाता।

भगवान श्री पारसनाथ के निर्वाण महोत्सव के अवसर पर श्री सम्मेद शिखरजी में देशभर से लाखों श्रद्धालु जुटे। पारसनाथ पर्वत की टोंक पर श्रद्धालुओं ने भगवान पारसनाथ की पूजा-अर्चना और वंदना कर निर्वाण महोत्सव में भाग लिया। इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन परिवर्तन का संदेश दिया। मुनि श्री ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में यदि व्यक्ति की दृष्टि बाहरी परिस्थितियों के बजाय अपनी आत्मा पर केंद्रित हो जाए, तो भय और चिंता स्वतः समाप्त होने लगती है। हर पल यह स्मरण रखना चाहिए कि “मैं आत्मा हूं।” आत्मबोध व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है और भय को दूर करता है। उन्होंने एक प्रसंग सुनाते हुए बताया कि एक व्यक्ति को किसी ने कह दिया था कि उसके ऊपर मारण मंत्र का प्रयोग किया गया है। भय के कारण उसका वजन तक 15 किलो कम हो गया। बाद में उसे आत्मा की अमरता का बोध कराया गया और नमोकार मंत्र के प्रति श्रद्धा जगाई गई। इसके बाद उसका भय समाप्त हो गया और वह सामान्य जीवन जीने लगा। मुनि श्री ने कहा कि अच्छे और पुण्यात्मा जीवों को भी कर्मों के उदय के कारण विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए यह नहीं सोचना चाहिए कि “मैं इतना धर्म करता हूं, फिर मेरे जीवन में कष्ट क्यों आते हैं?” कर्म की सत्ता बड़ी है, लेकिन धर्म की सत्ता उससे भी बड़ी है। कर्म का उदय कितना भी तीव्र क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है।

उन्होंने कहा कि भगवान पारसनाथ का जीवन क्षमा का संदेश देता है। जब-जब उनके सामने उपसर्ग आए, उन्होंने क्षमा को अपनाया। इसके विपरीत कमठ ने बैर और प्रतिशोध को बनाए रखा, जिसके कारण उसका पतन होता गया। मुनि श्री ने कहा कि मन में बैर की गांठ नहीं रखनी चाहिए। गलती हो तो तत्काल क्षमा मांगें और दूसरों को भी क्षमा करने का भाव रखें।उन्होंने कहा, “झगड़ा मत करो और यदि झगड़ा हो भी जाए तो उसे बखेड़ा मत बनने दो। बैर मत बनने दो, वहीं समाप्त कर दो।” क्रोध, बैर और द्वेष की गांठें मनुष्य के भविष्य को कठिन बना देती हैं।मुनि श्री ने श्रद्धालुओं से कहा कि पारसनाथ भगवान की पूजा और वंदना के साथ उनके जीवन से दिशा भी लें। आत्मबोध शांति देगा, कर्म सिद्धांत परिस्थितियों को समझने की शक्ति देगा और क्षमा बैर-द्वेष से मुक्त करेगी।गुणायतन प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कि पारसनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव पूरे देश में मनाया जा रहा है और इसका लाइव प्रसारण भी किया जा रहा है। गुणायतन एवं पारसधाम परिसर में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के संघ सानिध्य में मध्यान्ह में निर्वाण लाडू समर्पित किया गया। उन्होंने बताया कि आगामी श्रावक संस्कार शिविर में धर्म को जीवन में व्यावहारिक रूप से उतारने को लेकर मुनि श्री के विशेष प्रवचन होंगे।


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