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29 वर्षों की सेवा के बाद आचार्य मनोज जी को सरस्वती शिशु विद्या मंदिर बरगंडा ने दी भावुक विदाई।

गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।

सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बरगंडा में 29 वर्षों तक सेवा देने वाले आचार्य मनोज कुमार के विदाई सह सम्मान समारोह का आयोजन भावपूर्ण एवं गरिमामय वातावरण में किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष अर्जुन मिष्टकार और उपाध्यक्ष प्रदीप कुमार जैन समेत विद्यालय परिवार के सदस्य मौजूद रहे। प्रधानाचार्य आनंद कमल ने पुष्पगुच्छ एवं पुष्पमाला से आचार्य मनोज जी का स्वागत किया। इस दौरान अध्यक्ष अर्जुन मिष्टकार ने स्वर्ण मुद्रिका, उपाध्यक्ष प्रदीप कुमार जैन ने अंगवस्त्र, आचार्य नलिन ने पोशाक, राजीव आचार्य ने घड़ी और आचार्य रमेश ने अटैची भेंट कर सम्मानित किया। संस्था की ओर से ग्रेच्युटी एवं अर्जित अवकाश की राशि का चेक भी प्रदान किया गया। विद्यालय के हिंदी आचार्य एवं मीडिया प्रभारी डॉ. ब्रजेश बर्णवाल ने प्रशस्ति पत्र का वाचन किया। आचार्य अशोक ओझा ने प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। वहीं आचार्य शेखर ने स्वरचित कविता प्रस्तुत कर माहौल को भावुक कर दिया।आचार्या पृथा दीदी और आचार्य नलिन ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे कई आचार्य भावुक हो उठे। 

आचार्या पृथा दीदी और आचार्य नलिन ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे कई आचार्य भावुक हो उठे। प्रधानाचार्य आनंद कमल ने कहा कि आचार्य मनोज विद्यालय के स्तंभ रहे हैं। उनका अनुशासन और विद्यार्थियों के प्रति वात्सल्य सदैव प्रेरणादायी रहेगा। अध्यक्ष अर्जुन मिष्टकार ने कहा कि 29 वर्षों में उन्होंने आचार्य मनोज को कभी क्रोधित अवस्था में नहीं देखा। उपाध्यक्ष प्रदीप कुमार जैन ने उन्हें संत समान बताते हुए उनकी कार्यनिष्ठा की सराहना की। अपने भावुक संबोधन में आचार्य मनोज जी ने विद्यालय में अपने 29 वर्षों के सफर को याद किया। उन्होंने कहा कि एक आचार्य होना सौभाग्य के साथ-साथ चुनौतीपूर्ण भी है। विद्यार्थियों के शैक्षिक विकास के लिए आपसी सहयोग और समर्पण की भावना जरूरी है। कार्यक्रम प्रमुख आचार्य लक्ष्मीनारायण सहित सभी आचार्य बंधु-भगिनी ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंत में विद्यालय परिवार ने आचार्य मनोज जी के उत्तम स्वास्थ्य एवं मंगलमय जीवन की कामना की। ‘ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के उद्घोष के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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