64 ऋद्धि मंत्रों के अर्घ्य समर्पण के साथ श्रद्धा और साधना का अद्भुत संगम।
SHIKHAR DARPANFriday, July 24, 2026
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मधुबन,शिखर दर्पण संवाददाता।
अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर गुणायतन में आयोजित नौ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक साधना का विराट केंद्र बना हुआ है। शुक्रवार को राष्ट्रसंत मुनि श्री 108 प्रमाणसागर महाराज के सान्निध्य में 64 ऋद्धि मंत्रों के अर्घ्य श्रद्धालुओं ने अत्यंत श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ प्रभु चरणों में समर्पित किए। विशाल विधान मंडप में देशभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने एक स्वर में मंत्रोच्चार करते हुए आत्मकल्याण की भावना से आराधना की। मुनि प्रमाणसागर महाराज द्वारा प्रत्येक मंत्र का नौ बार शुद्ध उच्चारण कराया गया, जिसके बाद श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक अर्घ्य समर्पित किया। इससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिमय वातावरण से अनुप्राणित हो उठा। राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि मालेगांव से आए आठ वर्षीय बालक ऋषभ जैन को जैनत्व के संस्कार प्रदान किए गए। मुनि प्रमाणसागर महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा संपन्न हुई। वहीं, सिंगापुर से आए वैशालिका एवं पवन सिंगापुर को चक्रवर्ती विवाह के लिए आशीर्वाद प्रदान किया गया।
इस अवसर पर मुनि संधान सागर महाराज सहित शिखरजी में विराजमान मुनि विश्वास सागर महाराज, मुनि नवनीत सागर महाराज, मुनि ज्ञानभूषण सागर महाराज, मुनि संयम सागर महाराज, मुनि सार सागर महाराज, मुनि समादर सागर महाराज एवं मुनि रूप सागर महाराज की मंगलमयी उपस्थिति रही। विधानाचार्य अशोक भैयाजी एवं अभय भैयाजी के निर्देशन में चल रहे इस आयोजन में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। विधान के क्रम में शनिवार को 128, रविवार को 256, सोमवार को 512 तथा मंगलवार को 1024 अर्घ्य श्रद्धालुओं द्वारा प्रभु चरणों में समर्पित किए जाएंगे। राष्ट्रसंत मुनि प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि “मंत्र केवल उच्चारण का विषय नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण का माध्यम हैं। जब श्रद्धा, शुद्धि और सम्यक भाव के साथ मंत्र साधना की जाती है, तभी वह जीवन में वास्तविक परिवर्तन का कारण बनती है।” उन्होंने कहा कि श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान आत्मशुद्धि, सद्बुद्धि और सिद्धत्व की दिशा में आगे बढ़ने का श्रेष्ठ आध्यात्मिक अवसर है। उन्होंने बताया कि 64 ऋद्धि मंत्र आत्मबल, सकारात्मक चिंतन और आत्मोन्नति के प्रेरक हैं। जब साधक मंत्रों के अर्थ और भाव के साथ आराधना करता है, तभी उसकी साधना सार्थक होती है।आगामी 29 जुलाई को प्रातःकाल विधान का समापन होगा। इसके बाद दोपहर 2:30 बजे से चातुर्मास कलश स्थापना एवं मुनि संधान सागर महाराज का दीक्षा दिवस मनाया जाएगा। गुणायतन एवं श्री सेवायतन परिवार ने सभी श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में शामिल होकर धर्मलाभ लेने की अपील की है।