मधुबन मोड़ से महज 3 किलोमीटर दूर भौजेदहा व पोखरिया गांव में विकास की राह अब भी अधूरी।
SHIKHAR DARPANSunday, July 26, 2026
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पीरटांड,शिखर दर्पण संवाददाता।
गौरव भक्त.
जैनियों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल मधुबन पंचायत के बगल बांध पंचायत के भौजेदहा एवं पोखरिया गांव अब भी विकास से कोसों दूर है । नल-जल योजना के जल मिनार हांथी के दांत बने हुए हैं, एक कुएं के भरोसे दोनों गांव ग्रामीण अपनी प्यास बुझा रहे हैं । सड़क नहीं होने से बरसात में बढ़ जाती है परेशानी।पीरटांड़ प्रखंड के सुदूरवर्ती इलाकों में आज भी कई ऐसे गांव हैं, जहां विकास योजनाएं कागजों तक तो पहुंच गईं हैं, लेकिन धरातल पर ग्रामीणों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसा ही एक गांव है बांध पंचायत अंतर्गत भौजेदाहा व पोखरिया जो मधुबन मोड़ से महज करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मुख्य सड़क और मधुबन क्षेत्र से इतनी कम दूरी पर होने के बावजूद यह गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। ग्रामीणों के अनुसार गांव में सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की है। गांव के लोग आज भी एकमात्र कुएं के भरोसे अपनी प्यास बुझाने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में नल-जल योजना के तहत दो जलमीनार लगाए गए हैं, लेकिन नियमित रूप से पानी की सप्लाई नहीं होने के कारण ये जलमीनार ग्रामीणों के लिए महज दिखावा बनकर रह गए हैं। पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण गांव के सभी लोग एक ही कुएं का पानी इस्तेमाल करते हैं। बरसात के मौसम में ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के दौरान कई बार खेतों का पानी कुएं में घुस जाता है। इसके बावजूद मजबूरी में ग्रामीणों को उसी पानी का उपयोग करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पेयजल की स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें हर मौसम में परेशानी का सामना करना पड़ता है, लेकिन बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
*कच्ची पगडंडियों से गांव तक पहुंचते हैं ग्रामीण*:- भौजेदाहा व पोखरिया गांव में सड़क की समस्या भी लंबे समय से बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार गांव तक पहुंचने के लिए आज भी कच्ची पगडंडियों और ग्रामीण रास्तों का सहारा लेना पड़ता है। बरसात के दिनों में ये रास्ते कीचड़ और पानी से भर जाते हैं, जिससे आवागमन बेहद मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि गांव तक पक्की सड़क का निर्माण हो जाए तो लोगों को काफी राहत मिलेगी और गांव का विकास भी तेज गति से हो सकेगा। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क नहीं होने के कारण जरूरी काम के लिए बाहर आने-जाने में काफी परेशानी होती है। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और मरीजों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बरसात के मौसम में गांव का संपर्क मार्ग और भी खराब हो जाता है।
*स्कूल के बच्चे भी पीते हैं कुएं का पानी*:- गांव में एक विद्यालय भी संचालित है, लेकिन वहां भी पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय पोखरिया में पढ़ने वाले बच्चे भी उसी कुएं का पानी पीने को मजबूर हैं, जिसका इस्तेमाल पूरा गांव करता है। विद्यालय के शिक्षक ने बताया कि स्कूल में पानी की कोई अलग व्यवस्था नहीं होने के कारण कुएं से पानी लाकर ही स्कूल का पूरा काम चलाना पड़ता है। शिक्षक के अनुसार कुएं का पानी लाकर पीने के साथ-साथ विद्यालय के अन्य कार्यों में भी इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने बताया कि बरसात के दिनों में विद्यालय तक पहुंचने में भी काफी परेशानी होती है। गांव तक कोई पक्की या वैकल्पिक सड़क नहीं होने के कारण कच्चे रास्ते से होकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। बारिश के दौरान रास्ते की स्थिति खराब हो जाने से शिक्षकों और बच्चों दोनों को परेशानी होती है।
*कई बार शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान*:- ग्रामीणों ने बताया कि गांव की समस्याओं को लेकर कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया है। पेयजल, सड़क और विद्यालय में पानी की व्यवस्था को लेकर लगातार मांग की जाती रही है, लेकिन अब तक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि मधुबन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र से महज कुछ ही दूरी पर होने के बावजूद पोखरिया व भौजेदाहा गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति, नल-जल योजना को सुचारू कराने, विद्यालय में अलग पेयजल व्यवस्था और गांव तक पक्की सड़क का निर्माण कराने की मांग की है। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्याओं पर प्रशासन और जनप्रतिनिधि कब गंभीरता दिखाते हैं और भौजेदाहा गांव के लोगों को बुनियादी सुविधाओं का लाभ कब मिल पाता है।