संस्कारित बालक ही संस्कारित समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला : मुनि प्रमाणसागर।
SHIKHAR DARPANFriday, June 12, 2026
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गिरिडीह,शिखर दर्पण संवाददाता।
गुणायतन सम्मेद शिखरजी की पावन सिद्धभूमि पर आयोजित सराक जैन समाज का पंचदिवसीय सम्मेलन एवं धार्मिक शिविर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ संपन्न हो गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय संत मुनि प्रमाणसागर महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए संस्कारशाला आंदोलन से जुड़ने और नई पीढ़ी के चरित्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।गुणायतन के मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि मुनिश्री ने झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से आए सराक समाज के लोगों से अपने-अपने क्षेत्रों में संस्कारशाला प्रारंभ करने अथवा उसके संचालन में सहयोग देने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से माताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण सबसे प्रभावी रूप से माता के माध्यम से होता है। यदि आने वाली पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ना है तो माताओं को बच्चों के चरित्र निर्माण में सक्रिय योगदान देना होगा। समापन सत्र में मुनिश्री ने कहा कि तीर्थयात्रा और धार्मिक आयोजनों का वास्तविक लाभ तभी है जब व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का संकल्प लेकर लौटे।
उन्होंने कहा कि केवल ज्ञान अर्जित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे व्यवहार में उतारना भी आवश्यक है। मुनिश्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं से पूछा कि कौन अपने क्षेत्र में संस्कारशाला की जिम्मेदारी निभाने को तैयार है, जिस पर बड़ी संख्या में लोगों ने सहमति जताई। उन्होंने कहा कि संस्कारित बालक ही संस्कारित समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होते हैं। इसी उद्देश्य से संस्कारशाला अभियान से जुड़ने वाले लोगों को “संस्कार दूत” बनाया जाएगा। उन्हें प्रमाणपत्र, प्रशिक्षण एवं आवश्यक साहित्य उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही ओड़िया और बंगला भाषाओं में भी सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी तथा ऑनलाइन माध्यम से भी उन्हें जोड़ा जाएगा। कार्यक्रम के दौरान मुनिश्री ने श्रद्धालुओं को अष्टमूल गुण धारण करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि इसमें नशा, मांसाहार और मधु (शहद) का त्याग तथा वट, पीपल, पाकड़, गूलर और कटूम्बर जैसे पांच उदुम्बर फलों का त्याग शामिल है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अष्टमूल गुणों को धारण करने का संकल्प लिया।अंत में सभी श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से नव बार णमोकार मंत्र का जाप किया और जिनशासन की प्रभावना के संकल्प के साथ पंचदिवसीय सम्मेलन एवं धार्मिक शिविर का समापन हुआ।